Bank Accountant से 94 लाख की साइबर ठगी, WhatsApp DP बदलकर बनाया शिकार

कंपनी डायरेक्टर की फोटो लगाकर अकाउंटेंट से 94 लाख की ठगी

- वाट्सऐप पर मैसेज कर दो बैंकों खातों की जमा राशि की ली जानकारी, मांग लिए मालिक बनकर ट्रांसफर करा ली रकम

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Bank Accountant ने बिना पुष्टि किए कर दिया RTGS ट्रांसफर, फर्जी WhatsApp अकाउंट से आया मैसेज

Mediawali news, Noida

नोएडा में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ठगों ने कंपनी डायरेक्टर की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट से करीब 94 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने WhatsApp पर कंपनी डायरेक्टर की डीपी लगाकर ऐसा जाल बिछाया कि Bank Accountant को जरा भी शक नहीं हुआ। बाद में असली डायरेक्टर से बातचीत होने पर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक मेरठ निवासी अमित कुमार मित्तल सेक्टर-65 स्थित सेवियर इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। अमित ने पुलिस को बताया कि 8 मई को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से WhatsApp मैसेज आया। उस नंबर की डिस्प्ले फोटो पर कंपनी के डायरेक्टर यशपाल सिंह धामा की तस्वीर लगी हुई थी। इतना ही नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर नंबर भी “धामा सर” के नाम से दिखाई दे रहा था, जिससे उन्हें लगा कि मैसेज वास्तव में कंपनी डायरेक्टर ने ही भेजा है।

Bank Accountant में बताया 1 करोड़ 60 लाख रुपये हैं मौजूद

मैसेज में सबसे पहले कंपनी के ICICI Bank और HDFC Bank खातों में मौजूद रकम की जानकारी मांगी गई। अकाउंटेंट ने जवाब देते हुए बताया कि कंपनी के ICICI बैंक खाते में लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये मौजूद हैं। इसके कुछ ही देर बाद उसी नंबर से एक और मैसेज आया, जिसमें तत्काल RTGS के जरिए 94.60 लाख रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। ठगों ने अकाउंटेंट पर जल्दी ट्रांजैक्शन करने का दबाव बनाया और बैंक खाते की पूरी डिटेल भी भेज दी। कंपनी डायरेक्टर का नाम और फोटो देखकर अमित कुमार मित्तल को कोई शक नहीं हुआ और उन्होंने बताए गए खाते में 94.60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ट्रांसफर के बाद उन्होंने UTR नंबर भी शेयर कर दिया। कुछ समय बाद जब कंपनी डायरेक्टर ऑफिस पहुंचे तो अकाउंटेंट ने उन्हें ट्रांजैक्शन की जानकारी दी। यह सुनते ही डायरेक्टर हैरान रह गए और उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने किसी भी तरह का पैसा ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहा था। इसके बाद अकाउंटेंट को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

Bank Accountant ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत किया दर्ज

घटना का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस अब मामले की जांच करते हुए बैंक खाते, मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और ट्रांजैक्शन डिटेल के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल ठग WhatsApp DP, नाम और प्रोफाइल बदलकर लोगों को आसानी से भ्रमित कर रहे हैं। खासतौर पर कंपनियों में काम करने वाले अकाउंटेंट और फाइनेंस कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे मामलों में जल्दबाजी और बिना पुष्टि किए किए गए ट्रांजैक्शन भारी नुकसान का कारण बन सकते हैं।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी बड़े बैंक ट्रांजैक्शन से पहले फोन कॉल, वीडियो कॉल या आमने-सामने बातचीत के जरिए पुष्टि जरूर करें। केवल WhatsApp मैसेज या डीपी देखकर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।


साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल ठग सोशल मीडिया और WhatsApp प्रोफाइल का गलत इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से धोखा दे रहे हैं। खासतौर पर कंपनियों के फाइनेंस और अकाउंट विभाग को निशाना बनाया जा रहा है। कई मामलों में अपराधी पहले कंपनी और कर्मचारियों की जानकारी जुटाते हैं, फिर उसी के आधार पर भरोसेमंद तरीके से संपर्क करते हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी बड़े बैंक ट्रांजैक्शन से पहले फोन कॉल, वीडियो कॉल या आमने-सामने पुष्टि जरूर करें। केवल WhatsApp मैसेज, डीपी या सेव नाम देखकर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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Saurabh Yadav
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