NEET पेपर लीक मामला: CBI को मिली मुख्य आरोपी मनीष की 14 दिनों की रिमांड, खुलेंगे कई बड़े राज
NEET पेपर लीक धांधली मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की बड़ी कामयाबी; मनीषा की कस्टडी से टूट सकता है सॉल्वर गैंग और पेपर लीक माफिया का पूरा नेटवर्क; जानें इस महाघोटाले की पूरी क्रोनोलॉजी।
Mediawali News, नई दिल्ली/पटना
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ एक और बड़ी कामयाबी लगी है। विशेष अदालत ने मामले की मुख्य कड़ियों में से एक, आरोपी मनीष को 14 दिनों की सीबीआई हिरासत (CBI Remand) में भेज दिया है। जांच एजेंसी का मानना है कि मनीषा से पूछताछ के बाद इस पूरे रैकेट के वित्तीय लेन-देन, बिहार-झारखंड के सॉल्वर गैंग और इस घोटाले के पीछे छिपे ‘मास्टरमाइंड’ का पर्दाफाश हो सकेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि मनीषा की भूमिका इस केस में क्या है और इस पूरे नीट पेपर लीक विवाद का इतिहास क्या रहा है।
NEET पेपर लीक में कौन है मनीष और क्या है उस पर आरोप?
सीबीआई की जांच के मुताबिक, मनीषा इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण ‘कड़ी’ या बिचौलिए (Middleman) के रूप में काम कर रही थी।
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आरोपियों से सीधा संपर्क: मनीषा का संबंध सीधे तौर पर उन मुख्य सरगनाओं से था जो पेपर लीक कराने और उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का जिम्मा संभाल रहे थे।
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वित्तीय लेन-देन का जिम्मा: सूत्रों के अनुसार, मनीषा पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Keys) खरीदने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों से करोड़ों रुपये वसूलने और उसे आगे सिंडिकेट तक पहुंचाने का आरोप है।
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14 दिनों की रिमांड क्यों?: सीबीआई ने अदालत के सामने दलील दी कि मनीषा के पास डिजिटल सबूतों, बैंक खातों और कई बेनामी संपत्तियों की जानकारी है। इस पूरे नेटवर्क का आमना-सामना कराने और सच उगलवाने के लिए 14 दिनों की विस्तृत पूछताछ बेहद जरूरी है।
NEET पेपर लीक का इतिहास और पूरी क्रोनोलॉजी (The History & Chronology)
नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक का यह मामला कोई अचानक सामने आई घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और पेशेवर गिरोह काम कर रहा था। आइए सिलसिलेवार तरीके से इसकी पूरी हिस्ट्री को समझते हैं:
1. मई: परीक्षा के दिन ही उठे सवाल
जब देश भर में लाखों छात्र नीट-यूजी की परीक्षा दे रहे थे, उसी दिन बिहार की राजधानी पटना और शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत पेपर लीक की खबरें सामने आईं। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ अभ्यर्थियों और दलालों को गिरफ्तार किया। उनके पास से जले हुए प्रश्नपत्र और एडमिट कार्ड बरामद हुए।
2. जून: नतीजों के बाद देशव्यापी आक्रोश
जब एनटीए (NTA) ने तय समय से पहले परीक्षा के परिणाम घोषित किए, तो देश दंग रह गया। इतिहास में पहली बार 67 छात्रों ने 720 में से 720 पूरे अंक हासिल किए, जिनमें से कई छात्र एक ही परीक्षा केंद्र के थे। इसके अलावा, ग्रेस मार्क्स (कृपांक) देने के अजीबोगरीब नियम पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। छात्र सड़कों पर उतर आए और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं की बाढ़ आ गई।
3. जून के अंत में: जांच CBI को सौंपी गई
मामले की गंभीरता, छात्रों के आक्रोश और देशव्यापी विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। बिहार ईओयू (EOU) और गुजरात पुलिस ने अब तक की अपनी जांच के सारे दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए।
4. ‘चिंटू’, ‘नीतीश’ और ‘सिकंदर’ का कनेक्शन
सीबीआई ने जांच संभालते ही बिहार और झारखंड में ताबड़तोड़ छापेमारी की। जांच में सामने आया कि ‘सिकंदर यदुवेंदु’, ‘नीतीश कुमार’ और ‘अमित आनंद’ जैसे चेहरों ने मिलकर पटना के एक प्ले स्कूल (खेमनीचक) में छात्रों को परीक्षा से एक रात पहले लीक हुआ पेपर रटवाया था। इसके बाद झारखंड के हज़ारीबाग के एक स्कूल के कस्टोडियन और कूरियर कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जहां से पेपर लीक हुआ था।
इस घोटाले का मॉडस ऑपेरेंडी (Modus Operandi) क्या था?
सीबीआई की अब तक की चार्जशीट और जांच के अनुसार, यह गैंग बेहद शातिराना तरीके से काम करता था:
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करोड़ों की डील: प्रत्येक छात्र से पेपर और सॉल्वर उपलब्ध कराने के एवज में 30 लाख से 50 लाख रुपये तक की डील की जाती थी।
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सुरक्षित ठिकाने (Safe Houses): परीक्षा से एक रात पहले छात्रों को गुप्त ठिकानों पर ले जाया जाता था, उनके मोबाइल फोन जमा करा लिए जाते थे और उन्हें उत्तर रटवाए जाते थे।
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सॉल्वर गैंग: मेडिकल कॉलेजों के स्कॉलर छात्रों को मोटी रकम देकर असली छात्रों की जगह बैठाने या उनके लिए आंसर की तैयार करने का काम सौंपा जाता था।
आगे क्या? मनीष की रिमांड से क्या बदलेगा?
मनीष की 14 दिनों की सीबीआई रिमांड इस केस में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट (मोड़) साबित हो सकती है। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि मनीष के जरिए वे उन ‘सफेदपोश’ लोगों तक पहुंच पाएंगे जो पर्दे के पीछे से इस पूरे नेक्सस को संरक्षण दे रहे थे। इसके अलावा, जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे, उनके मुख्य सोर्स का पता लगाना भी सीबीआई की प्राथमिकता है। सुप्रीम कोर्ट भी इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और सरकार से परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाने के लिए कह चुका है।