Noida जिला अस्पताल में युवक की मौत: घंटों बेंच पर बैठा रहा मरीज, सिस्टम की लापरवाही पर उठे सवाल

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जिला अस्पताल में मृत युवक की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल, फोटो कर सकती है विचलित

Mediawali news

नोएडा के जिला अस्पताल सेक्टर-39 में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि युवक इलाज कराने अस्पताल पहुंचा था, लेकिन समय पर इलाज और निगरानी नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद जिला अस्पताल प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को लेकर लोगों में नाराजगी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

जिला अस्पताल में इलाज कराने आया था युवक, दूसरी मंजिल पर मिला शव

जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान नीरज कुमार (32) पुत्र घनश्याम के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक नीरज की तबीयत खराब थी और वह 14 मई की रात इलाज के लिए जिला अस्पताल सेक्टर-39 पहुंचा था। बताया जा रहा है कि वह काफी देर तक अस्पताल में डॉक्टरों के इंतजार में बैठा रहा। देर रात करीब 11:30 बजे अस्पताल की दूसरी मंजिल पर उसका शव मिला। अस्पताल में तैनात कर्मचारी फरीद बाबू जब रात में राउंड पर पहुंचे तो उन्होंने युवक को बेंच पर अचेत अवस्था में देखा। सूचना मिलने के बाद सेक्टर-39 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को युवक के पास से एक मोबाइल फोन और अस्पताल की पर्ची भी मिली, लेकिन पर्चे पर नाम और पता दर्ज नहीं था। मोबाइल भी बंद मिला। हालांकि बाद में पुलिस ने मृतक की पहचान कर उसके परिवार को सूचना दे दी।

हार्ट अटैक की आशंका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक लग रही है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि युवक इलाज के लिए अस्पताल आया था और डॉक्टरों की प्राथमिक राय के अनुसार उसे दिल का दौरा पड़ा हो सकता है। हालांकि मौत का असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शव पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं मिले हैं। फिलहाल अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। साथ ही अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि युवक कितनी देर तक अस्पताल में मौजूद रहा और उसे समय पर मेडिकल सहायता मिली या नहीं।

घंटों बेंच पर बैठा रहा मरीज, किसी ने नहीं ली सुध

इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस जगह युवक मृत अवस्था में मिला, वहां से लगातार अस्पताल स्टाफ और गार्ड गुजरते रहते हैं। बावजूद इसके किसी की नजर उसकी बिगड़ती हालत पर नहीं पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक बेंच से टिककर बैठा हुआ था और देखने में ऐसा लग रहा था जैसे वह सो रहा हो। रात में जब गार्ड ने ध्यान से देखा तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस घटना ने अस्पताल की निगरानी व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर मरीज घंटों तक अस्पताल में बैठा रहा तो किसी डॉक्टर, नर्स या कर्मचारी ने उसकी स्थिति जांचने की कोशिश क्यों नहीं की।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर

घटना के बाद अस्पताल की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। फोटो में युवक बेंच से टेक लगाकर बैठा दिखाई दे रहा है। उसके पास पानी की बोतल रखी हुई है जबकि आसपास की बाकी बेंच खाली हैं। तस्वीर में पीछे अंधेरा भी दिखाई दे रहा है, जिसने सरकारी अस्पतालों की हालत और लापरवाही की तस्वीर लोगों के सामने ला दी। सोशल मीडिया यूजर्स इस घटना को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि अगर अस्पताल में समय पर निगरानी और इमरजेंसी सहायता उपलब्ध होती तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी।

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था की भी कहानी बयान करती है। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़, डॉक्टरों की कमी, स्टाफ की लापरवाही और कमजोर निगरानी व्यवस्था के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग होनी चाहिए। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की पहचान के लिए विशेष व्यवस्था जरूरी है जो गंभीर हालत में हों या लंबे समय तक बिना इलाज के इंतजार कर रहे हों।

जांच में जुटी पुलिस

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो सकेगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर जिम्मेदारी तय कब होगी। मरीज और उनके परिजन अब अस्पतालों में बेहतर इमरजेंसी सिस्टम और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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Anjali Priya
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