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नोएडा: सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ श्रमिकों के लिए बना रिपोर्टर

Mediawali news , Noida

नोएडा, 13 अप्रैल को कर्मचारियों के हुए प्रदर्शन के हिंसक होने के आरोप में जिस युवक को पुलिस और एसटीएफ ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से पकड़ा है, वह पिछले साल से नोएडा के सेक्टर-37 में किराए के कमरे पर रह रहा था। उसके साथियों को पुलिस ने 11 अप्रैल की शाम करीब सात बजे बॉटनिकल गार्डन से जैसे ही गिरफ्तार किया, वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। पुलिस को आशंका थी कि वह 13 अप्रैल तक दिल्ली में छिपा हुआ था। इसके बाद आरोपी लगातार लोकेशन बदलकर कई राज्यों में छिपता रहा। अंत में सर्विलांस के जरिए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल जून में आदित्य आनंद उर्फ रस्टी ने नोएडा के सेक्टर-37 में रहने के लिए एक कमरा लिया था। पूछताछ में उसने बताया कि उसकी उम्र लगभग 28 वर्ष है। उसने आरआर इंटर कॉलेज, कस्बा देसरी, वैशाली (बिहार) से 12वीं पास की है। वर्ष 2013 में वह पटना आकर रहने लगा। इसके बाद वर्ष 2020 में जमशेदपुर एनआईटी से बीटेक पास किया। उसी साल कैंपस सेलेक्शन के जरिए वह नोएडा की एक मल्टीनैशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी करने लगा।

इसके बाद वर्ष 2022 में वह गुरुग्राम (हरियाणा) शिफ्ट हो गया और एक अन्य कंपनी जॉइन कर ली। जून 2025 में वह गुरुग्राम से नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में आकर रहने लगा। इसी दौरान उसने फेसबुक पर एक संगठन के बारे में पढ़ा और वर्ष 2022 में ही वह उस संगठन से जुड़ गया। संगठन की मैगजीन और यूट्यूब चैनल भी है। संगठन ने उसे नोएडा की फैक्ट्रियों में होने वाली घटनाओं के लिए रिपोर्टर के तौर पर नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही वह पार्ट-टाइम एक सॉफ्टवेयर कंपनी में भी काम करता रहा। इसी दौरान वर्ष 2023 में संगठन से जुड़ी एक जनयात्रा के दौरान उसकी मुलाकात रूपेश रॉय से हुई। इसके बाद दोनों आंदोलनों में जाने लगे और रिपोर्टिंग करने लगे। रूपेश पार्ट-टाइम ऑटो चलाता है। रूपेश को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

दिल्ली के विश्वविद्यालय छात्रों की भूमिका की जांच

पुलिस और एसटीएफ की जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। 13 अप्रैल को हुए प्रदर्शन के दौरान अचानक 23 से 26 वर्ष के युवकों की भीड़ में एंट्री हुई थी। पुलिस को उनके व्यवहार से शक हुआ कि ये सामान्य श्रमिक नहीं हैं। जांच में सामने आया कि ये पढ़े-लिखे युवक थे, जो भीड़ का फायदा उठाकर पुलिस को चकमा दे रहे थे और श्रमिकों को हिंसा के लिए उकसा रहे थे।

एसटीएफ के मुताबिक, ये युवक दिल्ली के एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय के छात्र बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इन छात्रों और आदित्य आनंद के बीच कनेक्शन की जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि इन युवकों को नोएडा से ही किसी ने सूचना देकर बुलाया था। आरोपी को तमिलनाडु की अदालत में पेश किया गया है। वहां से ट्रांजिट रिमांड पर लाकर फेस-2 पुलिस के हवाले किया जाएगा। आगे की जांच फेस-2 पुलिस करेगी।

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