नोएडा श्रमिक प्रदर्शन को भड़काने के आरोप में तमिलनाडु से मास्टरमाइंड गिरफ्तार
नोएडा पुलिस ने एक लाख का रखा था इनाम, जमशेदपुर एनआईटी से बीटेक पास है, मास्टरमाइंड
यह नोएडा में कई स्थानों पर भाषण देते हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था,
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में 13 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कर्मचारियों को आगजनी और तोड़फोड़ के लिए उकसाने वाले मुख्य मास्टरमाइंड को पुलिस ने तमिलनाडु के तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रर्दशन के बाद से वह फरार चल रहा था। नोएडा पुलिस उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर चुकी थी। साथ ही आरोपी के खिलाफ फेज टू थाने में केस एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस अब आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा लाकर पूछताछ करेगी। साथ ही उनके अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
एडिशनल कमिश्नर डॉ राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि पकड़े गए आरोपी की पहचान झारखंड निवासी आदित्य आनंद (27) के रूप में हुई है। वह जमेशदपुर एनआईटी से बीटेक पास है। फिलहाल वह बेरोजगार है। पुलिस का दावा है कि वह नोएडा में 9 से 10 अप्रैल को आकर कर्मचारियों के बीच में पैठ बनाई। उन्हें वॉट्ग्रुप में जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही कई स्थानों पर लीडर के तौर पर भाषण दिया और उन्हें हक के लिए तोड़फोड़ और आगजनी के लिए उकसाया। पुलिस ने 11 अप्रैल की शाम सात बजे चार मजदूर कार्यकर्ता रूपेश, आकृति, सृष्टि, मनीषा को सेक्टर 37 बोटैनिकल गार्डन मेट्रो से अरेस्ट किया था। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने कर्मचारियों को उग्र होने के लिए भड़काया था। इसके बाद से आदित्य आनंद फरार हो गया। गिरफ्तार रूपेश रॉय के साथ में आदित्य आनंद सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था। इसके बाद पुलिस उसके खिलाफ फेज टू थाने में केस दर्ज की। पुलिस ने दावा किया है कि उसी ने प्रदर्शन को हिंसक रूप दिया। वह मास्टरमाइंड है। कई दिनों से फरार होने की वजह से पुलिस ने उसके खिलाफ एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था। शनिवार को पुलिस और एसटीएफ टीम को सफलता मिली है। अब उसे नोएडा लाया जा रहा है।
कई राज्यों में छिपता रहा आरोपी
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से आरोपी लगातार लोकेशन बदल रहा था और अलग-अलग राज्यों में छिपकर रह रहा था। पुलिस की टीमों ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगा। उसकी फोटो मेट्रो स्टेशन में कैद हुई थी। आरोपी शहर के बजाय रेलवे स्टेशन के माध्यम से शहर बदल रहा था। पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर लाकर आगे की पूछताछ करेगी, जिससे इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सके। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हिंसक प्रदर्शन के पीछे कोई संगठित नेटवर्क या अन्य साजिश तो नहीं थी।
दिल्ली एक यूनिवर्सिटी के छात्र भी प्रदर्शन में हुए थे, शामिल
पुलिस और एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि 13 अप्रैल को अचानक से कर्मचारियों के बीच में 23 से 26 साल के यंग लड़कों की एंट्री हुई। उन्हें देखकर पहले ही लगा कि ये लोग पढ़े लिखे हैं। लेकिन वो भीड़ का सहारा लेकर पुलिस को चकमा देने लगे और श्रमिको को हिंसा करने के लिए उसकाना शुरू कर दिया। एसटीएफ के मुताबिक दिल्ली से आए श्रमिक नहींं, बल्कि एक फेमस विश्वविद्यालय के छात्र थे। उनके साथ में आदित्य आनंद का कनेक्शन को तलाशने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि अचानक से उन छात्रों को कोई नोएडा से जानकारी भेजकर ही बुलाने की पुष्टि हुई है।
आधिकारिक वर्जन
पुलिस और एसटीएफ की छह टीमें आरोपी की तलाश कई राज्यों में दबिश दे रही थी। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से शनिवार को उसे तमिलनाडु के तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने कोर्ट से एनबीडब्ल्यू जारी के आधार पर उसकी अरेस्टिंग की है। डॉ. राजीव नारायण मिश्र, अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था)