Gautam budha nagar: फसलों में कीट और रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग की एडवाइजरी जारी

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Gautam budha naga के जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दुबे ने जायद फसलों में बढ़ते कीट एवं रोगों के खतरे को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
Mediawali news, Noida

Gautam budha naga  के जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दुबे ने जायद फसलों में बढ़ते कीट एवं रोगों के खतरे को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि मौसम में लगातार हो रहे तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में विभिन्न प्रकार के कीट और रोग तेजी से फैल सकते हैं। ऐसे में किसान समय रहते बचाव और प्रबंधन के उपाय अपनाकर अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

मक्का फसल में तना बेधक और फॉल आर्मी वर्म का खतरा

कृषि विभाग के अनुसार मक्का फसल में तना बेधक कीट का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। यदि खेत में 10 प्रतिशत तक मृत गोभ दिखाई दें तो किसान तुरंत दवा का छिड़काव करें। इसके लिए डाईमिथोट या नोवालुरोन एवं इमामेक्टिन बेन्जोएट का प्रयोग किया जा सकता है। फॉल आर्मी वर्म से बचाव के लिए खेतों में बर्ड पर्चर, लाइट ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। साथ ही जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा जैसे अंड परजीवी का उपयोग भी लाभकारी बताया गया है। अधिक प्रकोप होने पर निर्धारित कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

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अरहर की फसल में फल मक्खी और मोजैक रोग से सावधान

अरहर की फसल में फल मक्खी और स्टेरिलिटी मोजैक रोग का खतरा बना हुआ है। कृषि विभाग ने बताया कि यदि प्रति पौधा पांच संक्रमित फलियां दिखाई दें तो डाइमेथोएट, इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड का प्रयोग करें। बन्झा यानी स्टेरिलिटी मोजैक रोग से प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट करने की सलाह दी गई है। यह रोग माइट के माध्यम से फैलता है, इसलिए समय पर कीटनाशक का छिड़काव जरूरी है।

फली छेदक कीट से फसलों को बचाने के उपाय

फली छेदक कीट अरहर समेत कई दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचाता है। कृषि विशेषज्ञों ने खेत के चारों ओर गेंदे के पौधे लगाने की सलाह दी है, ताकि यह ट्रैप क्रॉप का काम कर सके। इसके अलावा एनपीवी जैविक दवा और फेरोमोन ट्रैप के प्रयोग की भी सलाह दी गई है। अधिक प्रकोप की स्थिति में एथियन या फ्लुर्बेडामाइड का छिड़काव किया जा सकता है।

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उर्द और मूंग में पत्ती धब्बा व पीला रोग का खतरा

उर्द और मूंग की फसल में सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग और पीला चित्तवर्ण रोग का खतरा बढ़ गया है। कृषि विभाग ने बताया कि रोग दिखाई देने पर मेटीरम या टेबुकोनाजोल का छिड़काव करें। पीला रोग सफेद मक्खी के कारण फैलता है। इसके लिए स्टिकी ट्रैप लगाने और डाइमेथोएट या एजाडिरेक्टीन का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

गन्ने की फसल में लाल सड़न और पायरिला कीट से बचाव जरूरी

गन्ने में लाल सड़न रोग और पायरिला कीट का खतरा बना हुआ है। विभाग ने किसानों को स्वस्थ बीज का उपयोग करने और रोगग्रस्त फसल को नष्ट करने की सलाह दी है। साथ ही स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस और कार्बेन्डाजिम के प्रयोग की भी सलाह दी गई है। पायरिला कीट के नियंत्रण के लिए जैविक उपायों के साथ क्लोरपाइरीफास दवा का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं टॉप बोरर कीट के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा और लाइट ट्रैप को लाभकारी बताया गया है।

आम की फसल में फल गिरने से बचाने के उपाय

आम की फसल में फलों के गिरने की समस्या से बचाव के लिए कृषि विभाग ने एएनएए दवा का छिड़काव करने की सलाह दी है। निर्धारित मात्रा में दवा को पानी में घोलकर 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है।

एनपीएसएस ऐप से मिलेगी तुरंत जानकारी

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) शुरू की गई है। इस ऐप के माध्यम से किसान अपनी फसल की फोटो अपलोड कर कीट और रोगों की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने मोबाइल में एनपीएसएस ऐप डाउनलोड करें और आधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव में गोष्ठियों और किसान पाठशालाओं के माध्यम से भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

 

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