Kanpur Kharif Productivity Seminar: प्राकृतिक खेती से बढ़ेगा दलहन-तिलहन उत्पादन
Kanpur Kharif Productivity Seminar: कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत तकनीक, जैविक विकल्प और कम लागत में अधिक उत्पादन के उपाय बताए, खरीफ सीजन की तैयारियों पर हुई विस्तृत चर्चा।
Mediawali news, kanpur
कानपुर नगर में शुक्रवार को चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कैलाश भवन ऑडिटोरियम में चित्रकूटधाम एवं झांसी मण्डल की संयुक्त मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 आयोजित की गई। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और खरीफ फसलों की उन्नत जानकारी दी गई। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रमुख सचिव कृषि, उत्तर प्रदेश शासन ने की, जबकि मुख्य अतिथि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही रहे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारम्भ
Kanpur Kharif Productivity Seminar का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान कृषि, बीज, मृदा परीक्षण, भूमि संरक्षण, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, लघु सिंचाई, इफको और कृभको सहित कई विभागों एवं संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए गए। किसानों ने इन स्टॉलों पर पहुंचकर नई कृषि योजनाओं और तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्य अतिथि सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि भारत में प्राचीन समय से प्राकृतिक खेती की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और कई गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष प्राकृतिक खेती योजना के लिए 95 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए 110 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि धान और गेहूं के अत्यधिक उत्पादन के बजाय अब दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। सरकार ने दलहनी फसलों का क्षेत्रफल चार लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।
किसानों को दी गई आधुनिक तकनीकों की जानकारी
प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र ने किसानों से रासायनिक खाद का कम उपयोग करने और जैविक खाद तथा हरी खाद को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। उन्होंने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराने की सलाह देते हुए कहा कि भविष्य में बिना फार्मर रजिस्ट्री के सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को देखते हुए कम पानी वाली फसलों जैसे दलहन, तिलहन, मूंगफली और रागी की खेती को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण के लिए चेकडैम निर्माण और वर्षा जल संचयन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
किसानों ने रखीं अपनी समस्याएं
गोष्ठी में चित्रकूटधाम और झांसी मण्डल के 13 जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की कृषि समस्याओं और सुझावों को साझा किया। किसानों ने भी अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं, जिनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों, धान उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य और पशुपालन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी दी। किसानों को समय-समय पर कृषि सलाह देने के लिए वैज्ञानिकों ने अपने मोबाइल नंबर भी साझा किए।
चयनित किसानों को मिला ढैंचा बीज मिनीकिट
कार्यक्रम के दौरान ई-लॉटरी के माध्यम से चयनित कानपुर नगर के चार किसानों को ढैंचा बीज मिनीकिट वितरित किए गए। अधिकारियों ने कहा कि इससे किसानों को हरित खाद उत्पादन में मदद मिलेगी और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी।
बड़ी संख्या में अधिकारी और किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी, सहकारिता विभाग के आयुक्त योगेश, विभिन्न मंडलों के आयुक्त, जिलाधिकारी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में किसान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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