स्वस्थ जीवन के लिए मौखिक स्वास्थ्य है जरूरी: विशेषज्ञ
अच्छा मौखिक स्वास्थ्य केवल सुंदर मुस्कान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी बेहद आवश्यक है। यह उन बातों में से एक है जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन इसके दुष्परिणाम कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। मेयो क्लिनिक की डॉ. एलिज़े सार्वास के अनुसार, “मुँह श्वसन और पाचन तंत्र का प्रवेश द्वार है। मुँह में मौजूद कुछ बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन जब इनका संतुलन बिगड़ जाता है या रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं, तो ये रक्त प्रवाह में पहुंचकर शरीर में सूजन फैला सकते हैं।”
डॉ. सार्वास बताती हैं कि खराब मौखिक स्वास्थ्य सिर्फ दांतों की समस्याएं—जैसे मसूड़ों की बीमारी, कैविटी या दांतों की सड़न—ही नहीं बढ़ाता, बल्कि शरीर के कई अन्य हिस्सों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उनके अनुसार, मुंह में होने वाली सूजन और संक्रमण हृदय संक्रमण, हृदय रोग, गर्भावस्था और प्रसव संबंधी जटिलताओं, तथा गंभीर स्थिति में निमोनिया जैसी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। यह वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध है कि मसूड़ों की सूजन (जिंजिवाइटिस) और पीरियडोंटल बीमारी का सीधा संबंध कई प्रणालीगत रोगों से पाया गया है।
इन गंभीर जोखिमों को देखते हुए विशेषज्ञ मौखिक स्वच्छता को दैनिक जीवन की प्राथमिकता में शामिल करने पर जोर देते हैं। इसके लिए कुछ आवश्यक उपाय सुझाए गए हैं:
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दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें। इससे दांतों की सतह पर जमा बैक्टीरिया और प्लाक दूर होते हैं।
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कम से कम एक बार फ्लॉस जरूर करें। विशेषज्ञों के मुताबिक, फ्लॉस न करने पर लगभग 40% दांतों की सतह साफ नहीं होती, जिससे कैविटी और मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
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साल में कम से कम दो बार दंत चिकित्सक से जांच कराएं। नियमित जांच से शुरुआती समस्याओं का समय रहते पता चल जाता है और समय पर इलाज संभव हो पाता है।
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चीनी का सेवन सीमित करें और पानी का सेवन बढ़ाएं। मीठे खाद्य पदार्थ बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जबकि पानी मुंह की सफाई में मदद करता है।
डॉ. सार्वास का कहना है कि सही मौखिक स्वास्थ्य न केवल दांतों को मजबूत बनाता है, बल्कि पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, दांतों की देखभाल को दैनिक आदत का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। स्वस्थ मुंह, स्वस्थ शरीर की नींव है—इसलिए इसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।