AAP में बगावत का असर: पंजाब में फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा, सांसदों को बताया ‘गद्दार’
Mediawali news
आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब में राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है, जो अब सड़कों पर खुलकर सामने आ रही है। जालंधर में कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के आवास की दीवारों पर ‘गद्दार’ लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया। इसी तरह लुधियाना में भाजपा में शामिल हुए सांसद राजेंद्र गुप्ता के कार्यालय की दीवारों पर भी ‘पंजाब के गद्दार’ लिख दिया गया।
नेताओं के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक और नेता प्रतिपक्ष एडवोकेट एच.एस. फुलका ने AAP नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की नीतियों ने पंजाब को नुकसान पहुंचाया है, जिसके कारण पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा। फुलका ने यह भी कहा कि जो नेता पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्होंने साहस दिखाया है और अपने विचार खुलकर सामने रखे हैं।
AAP का पलटवार और एकजुटता का दावा
दूसरी ओर, AAP ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भाजपा पर आरोप लगाए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने सांसदों के दल-बदल को ‘निंदनीय’ बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस तरह के झटकों से डरने वाली नहीं है और हर चुनौती के बाद और मजबूत होकर उभरेगी। अरोड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि संदीप पाठक और राघव चड्ढा जैसे बड़े नेता किस दबाव में आकर पार्टी छोड़ गए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि पार्टी कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है, ताकि बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
विपक्ष पर साधा निशाना
AAP नेताओं ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला है। अमन अरोड़ा ने कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने AAP के और विधायकों के टूटने का दावा किया था। अरोड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि वडिंग को अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें खुद नहीं पता चलता कि उनके नेता कब पार्टी छोड़ देते हैं।
संगठन पर असर और आगे की राह
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने AAP के संगठन को झटका जरूर दिया है, लेकिन पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि संगठन मजबूत है और जनता का समर्थन उसके साथ है। पार्टी का कहना है कि कुछ चेहरों के जाने से उसकी विचारधारा कमजोर नहीं होगी।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP इस संकट से कैसे उबरती है और क्या वह अपने कार्यकर्ताओं के गुस्से को शांत कर पाती है। फिलहाल, पंजाब की राजनीति में यह घटनाक्रम एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, जिसने सियासी समीकरणों को पूरी तरह हिला दिया है।