Noida Labour Protest : फेसबुक पेजों पर भड़काऊ और भ्रामक पोस्ट डालने के आरोप में दो मुकदमे दर्ज
श्रमिकों पर कार्रवाई को लेकर पुलिस के खिलाफ दुष्प्रचार का आरोप
पुलिस ने कहा, सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट डालकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर की कार्रवाई
Noida Labour Protest : पुलिस का दावा- सोशल मीडिया के जरिए नोएडा पुलिस की छवि खराब करने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की हुई कोशिश, एक फेसबुक पेज कराया गया बंद
Mediawali news, नोएडा
Noida labour protest में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक आंदोलन और हिंसक प्रदर्शन के मामले में अब सोशल मीडिया पर कार्रवाई तेज हो गई है। नोएडा पुलिस ने “मजदूर बिगुल” समेत दो अलग-अलग फेसबुक पेजों के खिलाफ साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि इन पेजों के माध्यम से सोशल मीडिया पर भ्रामक, झूठी और अपमानजनक पोस्ट वायरल की जा रही थीं, जिनका उद्देश्य पुलिस की छवि खराब करना और दोबारा कानून व्यवस्था बिगाड़ना था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की लगातार निगरानी की जाती है। इसी दौरान साइबर टीम को कुछ ऐसे पोस्ट और वीडियो मिले, जिनमें नोएडा पुलिस की कार्रवाई को गलत तरीके से पेश किया गया था। इसके बाद साइबर थाना पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए दो अलग-अलग केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इनमें से एक फेसबुक पेज को बंद भी करा दिया है।
“मजदूर बिगुल” फेसबुक पेज पर चला कथित कैंपेन
पुलिस के मुताबिक, 13 अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन के बाद “मजदूर बिगुल” नाम का फेसबुक पेज अचानक काफी सक्रिय हो गया था। इस पेज पर लगातार आंदोलन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े पोस्ट साझा किए जा रहे थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि जब पुलिस ने हिंसा और उपद्रव के आरोप में रुपेश रॉय, मनीषा चौहान, आकृति चौधरी, सत्यम वर्मा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया, तब सोशल मीडिया पर एक अलग तरह का अभियान शुरू किया गया। पुलिस का आरोप है कि फेसबुक पोस्ट, लेख और वीडियो के जरिए पुलिस कार्रवाई को “गैर-कानूनी”, “दमनकारी” और “उत्पीड़नात्मक” बताया गया। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि कुछ लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया और उनके साथ प्रताड़ना की गई। हालांकि पुलिस ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी गिरफ्तारियां कानूनी प्रक्रिया और अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई थीं।
पुलिस ने कहा- गलत जानकारी फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश
नोएडा पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए पोस्ट और वीडियो का मकसद आम लोगों को गुमराह करना था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस तरह की पोस्ट से लोगों में पुलिस और प्रशासन के खिलाफ गलत संदेश जा सकता था। पुलिस ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के जरिए औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को दोबारा भड़काने और अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही थी। ऐसे कंटेंट से कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी हो गई।
एडिटेड वीडियो वायरल करने का भी आरोप
इस मामले में दूसरा मुकदमा नोएडा पुलिस की सोशल मीडिया सेल में तैनात सब इंस्पेक्टर सुखदेव सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि 8 मई को सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान एक वीडियो सामने आया था। पुलिस के अनुसार यह वीडियो पुरानी पुलिस कार्रवाई का था, लेकिन उसे एडिट करके हाल के श्रमिक आंदोलन से जोड़ दिया गया। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया गया। आरोप है कि इस वीडियो के जरिए श्रमिकों को भड़काने, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में अशांति फैलाने और सरकार व पुलिस के खिलाफ आक्रोश पैदा करने की कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि वीडियो को इस तरह पेश किया गया जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती थी।
साइबर सेल ने कराया फेसबुक लिंक टेकडाउन
मामले को गंभीर मानते हुए नोएडा साइबर सेल ने संबंधित फेसबुक लिंक को टेकडाउन कराने की कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायत भेजी गई, जिसके बाद एक फेसबुक पेज को बंद करा दिया गया। अब पुलिस उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है जिसने वीडियो और पोस्ट अपलोड किए थे। साइबर थाना पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है और संबंधित अकाउंट्स की गतिविधियों को खंगाला जा रहा है।
श्रमिक आंदोलन की जांच पहले से जारी
गौरतलब है कि नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान कई जगह हंगामा और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस ने इस मामले में पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आंदोलन के दौरान हिंसा फैलाने के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और सोशल मीडिया की क्या भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक या उकसाने वाली सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी पोस्ट या वीडियो को बिना सत्यापन के शेयर न करें।
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