PoK में बवाल: JAAC पर बैन के बाद भड़की हिंसा, 11 लोगों की मौत, जानिए विरोध प्रदर्शन की बड़ी वजह
Mediawali news
Pakistan Occupied Kashmir (PoK) में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। आर्थिक संकट, राजनीतिक असंतोष और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों के बीच क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालात तब और बिगड़ गए जब प्रशासन ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इसके बाद शुरू हुई हिंसक झड़पों में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के जवान दोनों शामिल हैं।
कैसे शुरू हुई हिंसा?
हिंसा की शुरुआत उस समय हुई जब JAAC के समर्थक एक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर एकत्र हुए थे। यहां एक आंदोलनकारी कार्यकर्ता का शव लाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और झड़पें शुरू हो गईं। इस दौरान गोलीबारी और हिंसा की घटनाएं सामने आईं, जिससे कई लोगों की जान चली गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। साथ ही इंटरनेट सेवाओं पर भी आंशिक प्रतिबंध लगाया गया है और बड़ी सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई है।
JAAC क्या है और क्यों हुआ विवाद?
ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) एक नागरिक समूह है जो लंबे समय से क्षेत्र के आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाता रहा है। संगठन का दावा है कि वह आम जनता के अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।हालांकि प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। सरकार का कहना है कि समूह की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन रही थीं। दूसरी ओर, स्थानीय लोग और आंदोलनकारी इस फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार जनता की आवाज दबाने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रही है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
विरोध प्रदर्शन केवल JAAC पर प्रतिबंध तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई बड़े राजनीतिक और आर्थिक कारण भी हैं।
1. विधानसभा सीटों के आरक्षण का विरोध
सबसे बड़ा विवाद विधानसभा में सीटों के आरक्षण को लेकर है। प्रशासन ने 45 सदस्यीय विधानसभा में से 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इससे उनकी राजनीतिक भागीदारी कमजोर होगी और विधानसभा में स्थानीय जनता की आवाज कम हो जाएगी। प्रदर्शनकारी इस फैसले को अपने अधिकारों के खिलाफ मान रहे हैं।
2. आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई
पिछले दो वर्षों से क्षेत्र आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और आवश्यक सेवाओं की बढ़ती लागत ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार इन समस्याओं को दूर करने में नाकाम रही है। बिजली कटौती और महंगे बिलों के खिलाफ पहले भी कई बार आंदोलन हो चुके हैं। अब यह नाराजगी बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।
3. इंटरनेट बंदी और प्रशासनिक कार्रवाई
प्रदर्शनकारी इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध और आंदोलन से जुड़े नेताओं की मौत पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन लोगों की आवाज दबाने के लिए कठोर कदम उठा रहा है।
मानवाधिकार आयोग ने जताई चिंता
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने JAAC को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित किए जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार मिलना चाहिए। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि स्थिति की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजी जा सकती है, ताकि घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो सके।
आगे क्या हो सकता है?
JAAC नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वह सरकारी दबाव के बावजूद आंदोलन जारी रखेगा। संगठन ने इंटरनेट बंदी, नेताओं की मौत और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।
दूसरी ओर, 27 जुलाई को होने वाले चुनावों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
PoK में जारी यह संकट केवल एक संगठन पर प्रतिबंध का मामला नहीं है, बल्कि आर्थिक परेशानियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक अधिकारों से जुड़े गहरे असंतोष को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव कम होता है या नहीं, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।