प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे एक्स अकाउंट से फैलाई गई फर्जी सूचनाएं, मजदूरों को भड़काने में तीन नाम सामने आए
- पुलिस का दावा 31 मार्च और 1 अप्रैल से रचि गई साजिश, 9-10 अप्रैल से वॉट्सऐप से कर्मचारियों को जोड़ा
Mediawali news, noida
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शन और लेकर पुलिस जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। गुरुवार को पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि प्रदर्शन के बीच में हिंसा अचानक नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से भड़काई गई थी। जांच में पाया गया है कि प्रदर्शन के बीच में जिन दो एक्स अकाउंट @Proudindiannavi और @Mir_Ilyas_INC के माध्यम से 21 कर्मचारियों की मौत होने की फर्जी सूचना फैलाई थी, वे पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे। घटना वाले दिन ही दोनों अकाउंट पर डीजीपी के आदेश पर नोएडा में केस दर्ज किया गया था। इसके अलावा कुछ लोगों ने सोशल मीडिया, वॉट्सऐप ग्रुप और भड़काऊ भाषणों के जरिए मजदूरों को उकसाया, जिसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस मामले में तीन नाम सामने आए, जिनमें से झारखंड हजारीबाग मूल निवासी रूपेश रॉय और मनीषा सिंह को अरेस्ट कर लिया गया है जबकि तमिलनाडू के आदित्य आनंद की तलाश की जा रही है।
इन तीनों पर आरोप है कि ये लोग 31 मार्च और 1 अप्रैल से नोएडा के उन स्थानों को चिन्हिंत किया, जहां पर कंपनिया हैं। इसके बाद कर्मचारियों को प्रदर्शन के लिए उकसाया, साथ ही प्रदर्शन से पहले 9 व 10 अप्रैल से क्यूआर कोड के जरिए कर्मचारियों को वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ गया। ग्रुपों पर हिंसक प्रदर्शन करने के लिए उकसाया गया। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि झारखंड हजारीबाग मूल निवासी रूपेश राय वर्ष 2018 से और आदित्य आनंद 2020 से देशभर में विभिन्न आंदोलनों के दौरान सक्रिय हैं। रूपेश राय जहां लोगों को भड़काने के लिए जाता है, वहां ऑटो चालक बन जाता है और उनके बीच घुलमिल जाता है।
उधर आदित्य आनंद जमशेदपुर एनआईटी से बीटेक किया है और बेरोजगार है। कमिश्नर के अनुसार इन दोनों ने के साथ में एक मनीषा सिंह नाम की महिला है। ये तीनों देश के उन स्थानों में भम्रण करते हैं, जहां पर जमीन विवाद, पर्यावरण विवाद या किसी बात को लेकर प्रदर्शन होने की जानकारी मिलती है। ये उन लोगों को प्रदर्शन करने के लिए उकसाते हैं। ये लोग देश भर के 15 से अधिक संगठनों से जुड़े हैं। जहां भी कोई आंदोलन या विरोध प्रदर्शन होता है, वहां इनकी मौजूदगी दर्ज की गई है।
31 मार्च से शुरू कर दी थी रणनीति :
पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि जांच के मुताबिक 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा में मजदूरों के बीच इन तीनों ने अपनी पैठ बनानी शुरू की। इनका मूवमेंट सीसीटीवी में मिला है। नोएडा में तीनों ने मिलकर 9 और 10 अप्रैल को वॉट्सऐप ग्रुप बनाए, जिनमें QR कोड के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया। 10 अप्रैल को मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू किया और 11 अप्रैल को रोड जाम करने के लिए उकसाया गया। पुलिस का कहना है कि 11 अप्रैल को मजदूरों और प्रबंधन के बीच शांतिपूर्ण समझौता हो गया था, लेकिन इसी दौरान कुछ लोगों ने उत्तेजक भाषण देकर माहौल फिर से बिगाड़ दिया। इसके बाद 12 अप्रैल को पुलिस ने रुपेश और मनीषा सिंह को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन आदित्य आनंद फरार हो गया। तब तक कर्मचारियों को बड़ी संख्या में वॉट्सऐप ग्रुप पर जोड़ लिया गया था। उन्हें 13 अप्रैल को प्रदर्शन करने के लिए उकसाया गया, आगजनी, तोड़फोड़, पथराव के लिए प्रेरित करने की बात समाने आई है।
पहले पर्दे के पीछे से किया ऑपरेट, लीडर पकड़े गए तो खुद आए सामने
पुलिस का कहना है कि इन तीनों ने पहले वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए कर्मचारियों के ग्रुप से एक-एक लीडर बनाया। उन्हें भाषण देने के लिए उकसाया, लेकिन पुलिस उन लीडर को चिन्हिंत कर 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर ली। इसके बाद ये तीनों खुद सामने आए और कर्मचारियों के भीड़ को इकठ्ठा कर भड़काउ बयान दिए। पुलिस का दावा है कि इन तीनों के बारे में जांच की गई, तो सामने आया कि ये पिछले 10 दिन से कर्माचारियों से मिल रहे हैं। उन्हें वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए जोड़ा है। सीसीटीवी में कैद हुए हैं। इनके कुछ लोग प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।
तीन महीने से संचालित हो रहा था, एक्स अकाउंट
सोमवार को प्रदर्शन के दौरान @Mir_Ilyas_INC एक्स हैंडल से 14 मजदूरों की मौत और @Proudindiannavi नाम के एक्स हैंडलों 7 लोगों की मौत होने की सूचना पोस्ट की गई। @Proudindiannavi पर नाम अनुषी तिवारी लिखा गया है। पुलिस ने तुरंत सेक्टर 20 थाने में केस दर्ज कराया। जांच में सामने आया कि दोनों X अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और इनमें VPN का इस्तेमाल किया गया था। इन दोनों अकाउंट के पोस्ट से दोपहर बाद कर्मचारी उग्र हो गए। पुलिस के अनुसार पिछले तीन महीनों से इन अकाउंट्स की गतिविधियां पाकिस्तान से संचालित होने के संकेत मिले हैं। पुलिस का मानना है कि नोएडा के कंपनियों को टारगेट किया जा रहा है। इसके लिए मजदूरों का डाटा बेस तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें भड़काने की कोशिश की गई।
17 लोगों ने आजगनी और तोड़फोड़ की घटनाएं की
अब तक इस मामले में 13 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें सोशल मीडिया अकाउंट भी शामिल हैं। पुलिस ने 62 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने माहौल को उग्र बनाया। आगजनी और तोड़फोड़ में 17 लोगों की पहचान की, जिसमें 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ लोग पुलिस पर हमला करने वाली भीड़ का हिस्सा थे। गिरफ्तार लोगों में ज्यादातर गैर-श्रमिक हैं। कुछ लोग बाहर से आए थे और हिंसा में शामिल हुए। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कौन लोग और संगठन सक्रिय हैं।