फर्जी कंपनियां बनाकर ब्लैक मनी को वाइट करने वाले डायरेक्टर समेत तीन शातिर गिरफ्तार
Mediawali news,Noida
दिल्ली में फर्जी कंपनी खोलकर ब्लैक मनी को वाइट करने वाले दो डायरेक्टर समेत तीन को साइबर थाने की पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया। आरोपी साइबर ठगों के संपर्क में आने के बाद डोरटेक्स और स्टैमव्यू नाम की कंपनी खोली। इसके बाद नोएडा के सेक्टर 44 स्थित बैंक में करंट अकाउंट ओपन कराया। जिसमें दो महीने के अंदर एक करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन हुए तो बैंक ने दोनों बैंक खाते फ्रीज कर दिए। साथ ही नोएडा साइबर थाना पुलिस को जानकारी दी। मामले में पुलिस ने जांच की तो आरोपियों के खातों के खिलाफ कर्नाटक, जम्मूकश्मीर, पंजाब व अन्य राज्यों साइबर धोखाधड़ी संबंधित शिकायते दर्ज मिली। शुक्रवार को कंपनी के दोनों डायरेक्टर खाता चालू करवाने पहुंचे थे, पुलिस ने उन्हें धरदबोचा। मामले में उनके अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
नोएडा एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान अविनाश झा, हिमांशु कुमार और जितेंद्र दहिया उर्फ आशू के रूप में हुई है। तीनों दिल्ली के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन और दो हजार 800 रुपये कैश, एक मोहर और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। अविनाश झा और हिमांस बनाई गई कंपनी के डायरेक्टर हैं। जितेंद्र के ऊपर रुपये हेरफेर करने की जिम्मेदारी थी। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कई फर्जी कंपनियां बना रखी थीं। इन कंपनियों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए गए थे। साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से हासिल रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में मंगाई जाती थी।
इसके बाद पैसे को कई खातों और माध्यमों से ट्रांसफर कर उसे वैध कमाई की तरह दिखाया जाता था। यह पूरा नेटवर्क काली कमाई को सफेद बनाने का काम कर रहा था। आसान भाषा में कहें तो साइबर ठगी से आया पैसा सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उसे फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि रकम का असली स्रोत छिपाया जा सके। पुलिस को जांच में इन खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले हैं। तीनों को कोर्ट में पेश किया, गया जहां से उन्हें जेल भेजा गया है।
कपड़ा व्यापारी और इलेक्ट्रॉनिक सामान के बने सप्लायर
पुलिस पूछताछ में अविनाश और हिमांशु ने बताया कि उन्होंने डोरटेक्स कंपनी के नाम पर खाता खुलवाने के लिए खुद को कपड़ा व्यापारी होने की बात कही थी। साथ ही स्टैमव्यू कंपनी के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान के सप्लायर होना बताया। आरोपियों के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर तीन शिकायते मिली हैं। यह तीनों 12वीं पास हैं। पहले छोटे काम करते थे। ये लोग दूसरे के नाम पर भी करंट बैंक खाते खुलवाते थे। पुलिस अब ऐसे लोगों की तलाश कर रही है।
मुख्य आरोपी कोई और है
पुलिस ने बताया कि अविनाश और हिमांशु एक कंपनी में नौकरी करते थे। वहीं पर एक व्यक्ति मिला, जिसने उन्हें सीधा कंपनी का मालिक बनने की प्रक्रिया बताई। झांसे में लेने के बाद दोनों के नाम पर फर्जी तरीके से एक कंपनी खोलने के दस्तावेज दे दिए। खाते चालू कराने में मदद की। पुलिस को आशंका है कि दिल्ली एनसीआर में बढ़ रही साइबर ठगी के रुपये इन्हीं खातों में आते थे, इसके बाद ये आरोपी उसे कैश निकालने के बाद दूसरे प्रोसेस से उसे ठगों तक पहुंचाते थे। साथ ही काली कमाई करने वालों से सांठगांठ कर रकम को सफेद करने रहे थे।