सीईओ का मोबाइल कब्जे में लेकर 49 करोड़ की वर्चुअल करेंसी की ट्रांसफर
Mediawali news, Noida
नोएडा के सेक्टर 65 में स्थित ब्लॉकचेन कंपनी को-फॉउंडर और सीईओ ने साइबर थाने में केस दर्ज कराने के बाद अपने पूर्व बिजनेस पॉर्टनर के खिलाफ पुलिस को नए सबूत दिए हैं। पीड़ित ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपी है। जिसमें वर्चुअल करेंसी को दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर करने की बात स्वीकार की गई है। साथ ही कई डिजिटल सबूत मौजूद हैं। आरोप है कि अगस्त 2025 युवराज रघुवंशी पीड़ित के नोएडा ऑफिस आया और इस दौरान उनके मोबाइल का पासकोड देखा। इसके बाद उन्हें दुबई बुलाया गया और वहां पर पीड़ित का मोबाइल कब्जे में लेकर 13 खातों को नए वॉलेट में इंपोर्ट किया गया। करोड़ों रुपये की क्रिप्टोकरेंसी अलग-अलग वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दी गई। जिसमें लगभग 39 लाख यूएसडीटी, बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना और अन्य डिजिटल टोकन शामिल थे। जोकि भारतीय रुपये में करीब 49 से 50 करोड़ बताई गई है। मामले में पुलिस नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली विवेक विहार शाहदरा निवासी प्रतीक गौरी ब्लॉकचेन कारोबारी हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि साल 2021 में नई दिल्ली में प्रतीक द्विवेदी से उनकी मुलाकात हुई। दोनों की बातचीत टेक्नोलॉजी, क्रिप्टोकरेंसी और भविष्य की इंटरनेट तकनीक वेबथ्री को लेकर होती थी। दोनों ने मिलकर 5ire नाम की एक ब्लॉकचेन कंपनी शुरू की। कंपनी में प्रतीक गौरी सीईओ बने। वे निवेशकों से बातचीत, फंडिंग और बिजनेस संचालन संभालते थे। वहीं प्रतीक द्विवेदी को चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर की जिम्मेदारी मिली। बाद में इस कंपनी को 5ire टेक्नोलॉजी हॉल्डिंग लीमिटेड नाम से विदेश में रजिस्टर कराया गया। कंपनी ने अक्टूबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच सॉफ्ट मॉडल के जरिए लगभग 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग जुटाई। निवेशकों ने यह रकम यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में कंपनी के डिजिटल वॉलेट में भेजी। केवल 11 महीनों में कंपनी को यूनिकॉर्न स्टार्टअप का दर्जा भी मिल गया। पीड़ित का आरोप है कि प्रतीक द्विवेदी अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभा रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे।
गोपनीयता बनाए रखने के लिए मोबाइल कब्जे में लिया
25 जनवरी 2026 को शाम करीब 5 बजे प्रतीक द्विवेदी और हिमांशु शर्मा ने प्रतीक गौरी को दुबई स्थित एक ऑफिस में बुलाया। कहा गया कि कंपनी विवाद को आपसी सहमति से सुलझाना है। मीटिंग के दौरान सभी लोगों से कहा गया कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन दूसरे कमरे में रख दिए जाएं। लगभग एक घंटे तक फोन के अंदर हिमांशु शर्मा ने चोरी किए गए पासकोड की मदद से मोबाइल अनलॉक किया। फिर उसने ट्रस्ट वॉले ऐप खोला, उसका पिन डाला और पीड़ित के 13 अलग-अलग क्रिप्टो खातों की सीड सीड फ्रेज कॉपी कर ली। इसके बाद करोड़ों रुपये की क्रिप्टोकरेंसी अलग-अलग वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दी गई। सभी ने वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर रकम को आपस में बांट लिया। आरोप है कि राहुल रौतेला को डेटा लीक और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बदले 1 लाख डॉलर दिए गए।
यूनिकॉर्न कंपनी किसे कहते हैं, कुल वैल्यू 1 बिलियन डॉलर
स्टार्टअप की दुनिया में जिस कंपनी की कुल वैल्यू 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 8 हजार करोड़ रुपये या उससे ज्यादा हो जाए, तो उसे यूनिकॉर्न कंपनी कहा जाता है। कंपनी में विदेशी निवेशकों ने निवेश किया था, सेक्टर 65 में ऑफिस है। पीड़ित के बिजनेस पार्टनर ने 9 लोगों के साथ मिलकर ठगी करने की साजिश रची, जिसमें राहुल रौतेला, उत्कर्ष द्विवेदी, अमन द्विवेदी, युवराज रघुवंशी, अविरल अग्रवाल, करण आहलूवालिया, वैभव और अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। कंपनी खुद का 5ire नाम का डिजिटल करेंसी है।