पश्चिम एशिया संकट के बीच जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री से अहम बातचीत, ऊर्जा सुरक्षा पर भारत सतर्क
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ईरान के विदेश मंत्री से हुई विस्तृत बातचीत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से फोन पर विस्तृत बातचीत की।
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बार बातचीत हुई है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देशों ने मौजूदा हालात पर चर्चा की और आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। ईरान द्वारा Strait of Hormuz के पास समुद्री मार्ग पर लगभग नाकेबंदी जैसे हालात पैदा होने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।
यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इसलिए भारत समेत कई देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है।
अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी चर्चा
भारत ने इस संकट को देखते हुए कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ा दी है। जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री Cho Hyun से भी बातचीत की।
इन वार्ताओं में पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात और उसके वैश्विक असर पर चर्चा की गई।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पहली बातचीत
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है।
बताया जा रहा है कि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में हुई थी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता
पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इसी वजह से भारत सहित कई देश हालात पर नजर बनाए हुए हैं और कूटनीतिक स्तर पर समाधान की कोशिशें तेज कर रहे हैं।