ओवैसी बोले: “भारत में होगी हिजाबधारी महिला पीएम, नितीश राणे ने किया खारिज”
नई दिल्ली।
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। महाराष्ट्र के सोलापुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने भारत और पाकिस्तान के संविधान की तुलना करते हुए कहा कि जहां पाकिस्तान का संविधान प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे शीर्ष पदों को केवल एक विशेष धर्म तक सीमित करता है, वहीं भारत का संविधान हर नागरिक को समान अवसर देता है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवैधानिक समावेशिता है, जहां कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है।
“हिजाबधारी महिला प्रधानमंत्री बनेगी”
ओवैसी ने अपने भाषण में कहा,
“मेरा सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। यह दिन जरूर आएगा।”
उन्होंने इस बयान के जरिए भारत के संविधान में निहित समानता और धार्मिक स्वतंत्रता को रेखांकित करने की कोशिश की। ओवैसी के मुताबिक, भारत में पद और प्रतिष्ठा किसी धर्म, पहनावे या पहचान से नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों से तय होते हैं।
नितीश राणे का तीखा पलटवार
ओवैसी के बयान पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितीश राणे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ओवैसी इस तरह के बयान “हिंदू राष्ट्र” में नहीं दे सकते। राणे ने दावा किया कि देश की 90 प्रतिशत आबादी हिंदू है और हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिलाएं प्रधानमंत्री या मुंबई की मेयर नहीं बन सकतीं।
उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा,
“जो लोग ऐसे पदों की बात करते हैं, उन्हें अपने इस्लामिक देशों, जैसे कराची, जाना चाहिए।”
AIMIM का पलटवार, संविधान का हवाला
नितीश राणे के बयान के बाद AIMIM नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। पार्टी नेता वारिस पठान ने कहा कि भारत का संविधान किसी नागरिक को प्रधानमंत्री, गवर्नर या मेयर बनने से नहीं रोकता।
उन्होंने कहा,
“यह हमारा संवैधानिक अधिकार है कि हम यह सपना देखें कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भी प्रधानमंत्री बने।”
भाजपा ने भी कसा तंज
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले AIMIM को अपने संगठन में किसी हिजाबधारी या पासमांदा महिला को अध्यक्ष बनाना चाहिए, उसके बाद प्रधानमंत्री बनने की बात करनी चाहिए। उन्होंने ओवैसी के बयान को राजनीतिक दिखावा करार दिया।
चुनावी माहौल में बढ़ी गरमाहट
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब मुंबई समेत महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि धर्म, पहचान और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति में फिर से केंद्र में आ गए हैं।
संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का संविधान किसी भी नागरिक को धर्म या पहनावे के आधार पर किसी पद से वंचित नहीं करता। ओवैसी के बयान ने एक बार फिर महिलाओं, अल्पसंख्यकों और समान अवसर के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है।