NSEL के निवेशकों के लिए 1,950 करोड़ का वन-टाइम सेटलमेंट मंजूर
1,950 करोड़ रुपये की सेटलमेंट योजना को हरी झंडी
1,950 करोड़ रुपये की सेटलमेंट योजना को हरी झंडी
मुंबई: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) और निवेशकों के बीच वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कुल 1,950 करोड़ रुपये की राशि 5,682 निवेशकों में उनके बकाया के अनुसार बांटी जाएगी। सेटलमेंट के बाद NSEL से जुड़े सभी कानूनी मामले बंद हो जाएंगे और निवेशकों के अधिकार आधिकारिक रूप से 63 मून्स टेक्नोलॉजीज को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे।
2013 में बंद हुआ था NSEL, हजारों निवेशक हुए थे प्रभावित
NSEL वर्ष 2013 में बंद हो गया था। उस समय करीब 13,000 निवेशकों के पास कुल 5,600 करोड़ रुपये का बकाया था। इसके चलते कई लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। अब लगभग 12 साल बाद इस बड़े वित्तीय विवाद का समाधान निकलता दिख रहा है। ये सेटलमेंट योजना NSEL और उसकी पैरेंट कंपनी 63 मून्स टेक्नोलॉजीज द्वारा मिलकर तैयार की गई थी और इसे NCLT के पास स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया था।
निवेशकों ने दी भारी संख्या में सहमति
सेटलमेंट प्रस्ताव को लागू करने के लिए NCLT ने पहले कंपनी को इसे निवेशकों के वोट के लिए प्रस्तुत करने को कहा था। वोटिंग में 93% निवेशकों ने योजना का समर्थन किया, जबकि 91% बकाया मूल्य के अनुसार भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश निवेशक इस समझौते के पक्ष में हैं और लंबे समय से फंसी अपनी राशि वापस पाना चाहते हैं।
छोटे निवेशकों को पहले भी मिली थी राहत
याद रहे कि अगस्त 2013 में NSEL ने लगभग 179 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जिससे 7,053 छोटे निवेशकों को लाभ हुआ था। ये वे निवेशक थे जिनकी बकाया राशि 10 लाख रुपये से कम थी। हालांकि कंपनी के पास भुगतान का सीधा फंड उपलब्ध नहीं था, लेकिन प्रमोटर्स ने सभी बकाया निपटाने में सहयोग देने की सहमति जताई थी।
अधिकारियों और निवेशक संगठनों ने फैसले का स्वागत किया
NSEL के MD और CEO नीरज शर्मा ने कहा कि यह समाधान सरकार के सहयोग के बिना संभव नहीं था। वहीं NSEL निवेशक फोरम (NIF) के चेयरमैन शरद कुमार साराफ ने भी इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि यह निवेशकों के लिए बहुप्रतीक्षित राहत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक महत्वपूर्ण फैसला है, जो न केवल NSEL निवेशकों को वर्षों से रुकी हुई राशि लौटाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसे वित्तीय विवादों के निपटारे का रास्ता भी साफ करेगा।