पोंजी और मनी सर्कुलेशन योजना के तहत सैकड़ों लोगों से 200 करोड़ी की ठगी
नोएडा में पोंजी और मनी सर्कुलेशन योजना के तहत सैकड़ों लोगों से 200 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में कंपनी डायरेक्टर, मैनेजर समेत पांच नामजद और 10 अज्ञात के खिलाफ सेक्टर 142 थाने में केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि नेटवर्क मार्केटिंग के तहत ये लोग फर्जी ट्रेडिंग की निवेश योजनाएं चलाईं। पीड़ितों को 6 से 15 प्रतिशत महीने का लाभ झूठा लालच देकर 20, 30 और 56 लाख रुपये तक का अमाउंट निवेश करवा लिए। वहीं नोएडा के भूटानी अल्फाथम और डीएलएफ मॉल जैसे स्थानों पर ऑफिस खोली, इसके बाद बंद करके फरार हो गए। आरोपी शुरुआत में कुछ रिटर्न देकर पीड़ितों को झांसे में लिया। साथ ही नेटवर्किंग मार्केट के तहत नए लोगों को जोड़ने पर कमीशन का प्रलोभन देते थे। मामले में पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
जनपद शामली गागौर निवासी रजत चौधरी ने पुलिस को बताया कि वह पेशे से व्यापारी हैं। उन्हें किसी माध्यम से जानकारी हुई की सेक्टर 90 भूटानी अल्फाथम टावर में मोमेंटम कैटेलिस्ट सर्विस नामक कंपनी माय ट्रेड निवेश योजनाएं चला रखी है। आरोपी खुद को प्रोफेशनल ट्रेडर बताते थे और दावा करते थे कि उनके पास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (एनआईएसएम) सर्टिफिकेट है।
लोगों को बताया जाता था कि उनका पैसा शेयर मार्केट और ट्रेडिंग में लगाया जाएगा, जहां से हर महीने 6 से 15 फीसदी तक तय मुनाफा मिलेगा। पीड़ित ने झांसे में आकर ठगों को कई किस्तों में कुल 57 लाख रुपये निवेश कर दिए। कुछ दिन उन्हें निवेश के रिटर्न मिले, लेकिन बाद में ठगों ने उन्हें कमीशन देना बंद कर दिया। पीड़ित ने दावा किया है कि इस तरह इन लोगों ने सैकड़ों के साथ में करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी की और ऑफिस बंद कर फरार हो गए। मामले में पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
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नेटवर्किंग मार्केट के तहत करते थे सेमिनार
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि कंपनी का मालिक नूर मोहम्मद, बिलाल सह निदेशक, अब्दुल रहमान फील्ड कोआर्डिनेटर, अनस मोहम्मद मैनेजर, शाहवेज कलेक्शन एंजेट हैं। ये लोग पीड़ित को झांसे में लेने के बाद एक सेमिनार में बुलाते थे। उन्हें निवेश करने के बाद तीन लोगों को जोड़ने वाली योजना बताई जाती थी। पीड़ित का कहना है कि आरोपी लगातार ऑफिस लोकेशन बदलते रहते थे। जब लोगों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया तो ऑफिस बंद कर दिए गए और आरोपी फरार हो गए।
नए लोगों को जोड़ने पर मिलता था कमीशन
पीड़ित ने यह भी पुलिस को बताया कि आरोपी नेटवर्क मार्केटिंग और पोंजी स्कीम की तर्ज पर काम कर रहे थे। निवेशकों को कहा जाता था कि अगर वे नए लोगों को जोड़ेंगे तो उन्हें अलग से कमीशन मिलेगा। इसी लालच में कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी स्कीम में जोड़ दिया। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने एक संगठित नेटवर्क बनाकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए। शुरुआती निवेशकों को नए लोगों के पैसे से भुगतान किया जाता था, जिससे स्कीम असली लगती थी।
पुलिस कर रही बैंक खातों और निवेश की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। वहीं पीड़ितों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और फंसी रकम वापस दिलाने की मांग की है।
क्या होती है पोंजी योजना और मनी सर्कुलेशन
पोंजी योजना एक अवैध निवेश ठगी होती है। इसमें लोगों को कम समय में बहुत ज्यादा और गारंटीड मुनाफे का लालच दिया जाता है। सल में कोई बड़ा बिजनेस या ट्रेडिंग नहीं होती। नए निवेशकों से लिया गया पैसा पुराने निवेशकों को रिटर्न के रूप में दिया जाता है, ताकि लोगों को लगे कि स्कीम सही चल रही है। जैसे-जैसे नए लोग जुड़ते हैं, उन्हीं के पैसे से पुराने लोगों को भुगतान होता रहता है। जब नए निवेशक आना बंद हो जाते हैं, तो स्कीम टूट जाती है और ज्यादातर लोगों का पैसा डूब जाता है। यह भारत में बैन है। वहीं मनी सर्कुलेशन योजना में कमाई का मुख्य तरीका नए लोगों को जोड़ना होता है। इसमें लोगों से कहा जाता है कि दो लोगों को जोड़ो और उनके जुड़ने पर कमीशन मिलेगा। जितनी बड़ी टीम, उतनी बड़ी कमाई आएगी। जोकि अवैध मानी जाती है।