लोकसभा में अमित शाह का सख्त संदेश: “गोली का जवाब गोली से देंगे”

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Amit Shah ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर नक्सली हथियार नहीं डालते हैं, तो उन्हें उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति बिल्कुल साफ है—जो हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास की व्यवस्था है, लेकिन जो गोली चलाएंगे, उन्हें उसी भाषा में जवाब मिलेगा।

“हथियार डालो या कार्रवाई के लिए तैयार रहो”

अमित शाह ने कहा कि सरकार केवल उन्हीं लोगों से बातचीत करेगी, जो हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आएं। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है कि वे नक्सल हिंसा का मुंहतोड़ जवाब दें। “गोली चलाओगे तो जवाब भी गोली से मिलेगा”—इस बयान के साथ उन्होंने सरकार के सख्त रुख को दोहराया।

‘अर्बन नक्सल’ पर भी साधा निशाना

गृह मंत्री ने तथाकथित “अर्बन नक्सल” पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग नक्सलियों के समर्थन में लेख लिख रहे हैं और सरकार से बातचीत की मांग कर रहे हैं। शाह ने सवाल उठाया कि इन लोगों की मानवता केवल उन लोगों के लिए क्यों है, जो संविधान का उल्लंघन करते हैं और हथियार उठाते हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिक, जो नक्सली हिंसा का शिकार होते हैं, उनके प्रति ऐसी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई जाती।

राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप

इस दौरान अमित शाह ने Rahul Gandhi पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अतीत में ऐसे लोगों के साथ मंच साझा किया, जिन पर नक्सल विचारधारा से जुड़े होने के आरोप रहे हैं। शाह ने 2010 में ओडिशा की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने लाडो शिकोका के साथ मंच साझा किया था। इसके अलावा 2018 में हैदराबाद में गुमड़ी विट्ठल राव (गद्दार) से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2025 में कुछ संगठनों के साथ उनकी मुलाकातें हुईं और नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों में उनका रुख सवालों के घेरे में रहा है।

सरकार की दोहरी रणनीति: सख्ती और पुनर्वास

अमित शाह के बयान से साफ है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ दोहरी रणनीति अपना रही है—एक तरफ सख्त सुरक्षा कार्रवाई और दूसरी तरफ आत्मसमर्पण करने वालों के लिए पुनर्वास।उन्होंने कहा कि जो लोग हिंसा छोड़कर वापस आना चाहते हैं, उनके लिए सरकार हर संभव मदद करेगी। लेकिन जो लोग देश के खिलाफ हथियार उठाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

नक्सलवाद पर निर्णायक लड़ाई का संकेत

लोकसभा में दिए गए इस बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार अब नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के मूड में है। अमित शाह का यह सख्त संदेश न केवल नक्सलियों के लिए चेतावनी है, बल्कि उन सभी के लिए भी है जो किसी भी रूप में हिंसा का समर्थन करते हैं।

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