कंपनी का टेलर निकला आगजनी का आरोपी, पुलिस का दावा मानेसर आंदोलन से भी जुड़ा कनेक्शन

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नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक आंदोलन और हिंसक प्रदर्शन मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो सेक्टर 63 स्थित महाविरा कंपनी में टेलर का काम करता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर 10 से अधिक गाड़ियों में आग लगाई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले हरियाणा के मानेसर में हुए श्रमिक आंदोलन में भी सक्रिय रहा था। पुलिस को उसके मोबाइल से श्रमिक यूनियन से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। मामले में उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।

एडिशनल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) डॉ राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान नरेश कुमार पुत्र छोटेलाल के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश फतेहपुर के जैतीखेड़ा गांव का रहने वाला है और फिलहाल सेक्टर-63 थाना क्षेत्र के चोटपुर कॉलोनी में रह रहा था। उसकी उम्र करीब 45 साल है। 13 अप्रैल को श्रमिक प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ हुई, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ गई थी। सेक्टर-63 इलाके में विपुल मोटर्स के पास हिंसा और आगजनी की सबसे बड़ी घटना हुई थी। इस मामले में थाना सेक्टर-63 में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने दावा किया है कि नरेश कुमार उस दिन महाविरा कंपनी के अंदर पहुंचा था और कर्मचारियों को हड़ताल के लिए उकसाया। इसके बाद वह नारेबाजी करते हुए भीड़ के साथ बाहर निकला और विपुल मोटर्स के पास पहुंच गया, जहां पहले से बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

दावा है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से वहां खड़ी कई चार पहिया और दो पहिया गाड़ियों में आग लगा दी। देखते ही देखते गाड़ियां जलने लगीं। आरोप है कि भीड़ ने लोहे के पाइप और अन्य सामान से वाहनों में तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने कहा कि मौके से जुटाए गए विडियो और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों में आरोपी साफ तौर पर आगजनी करता दिखाई दे रहा है।

श्रमिक संगठन से जुड़ने का दावा
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि नरेश कुमार पहले हरियाणा के मानेसर में हुए श्रमिक आंदोलन में भी शामिल रहा था। उसके मोबाइल फोन से श्रमिक यूनियन से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड बरामद हुए हैं। हालांकि पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि उसका किसी बड़े नेटवर्क या संगठन से संबंध था या नहीं। पुलिस का कहना है कि हिंसा और आगजनी में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और जल्द ही बाकी आरोपियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस से बचने के लिए पोर्ट कराया सिम

पुलिस के अनुसार घटना के बाद आरोपी लगातार अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना मोबाइल नंबर दूसरी सर्विस कंपनी में पोर्ट करा लिया था, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रैक न कर सके। लेकिन पुलिस टीम ने तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के जरिए उसकी पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

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