फर्जी CBI अधिकारी बनकर ठगने वाले साइबर अपराधियों से जुड़े दो स्टूडेंट्स गिरफ्तार
दोनों के पास दो मोबाइल फोन बरामद, दूसरों को कमीशन के बहाने ठगी जाल में जोड़ने में लगे थे आरोपी
Mediawali news
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी रिटायर्ड बैंक कर्मी को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 लाख रुपये ठगी मामले में दो स्टूडेंट्स को साइबर थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों के बैंक अकाउंट में ठगी की गई, करीब 48.95 लाख रुपये रुपये ट्रांसफर हुए थे। वहीं आरोपियों के बैंक खाते के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर देश के अलग-अलग राज्यों से कुल आठ शिकायतें दर्ज हैं। दोनों विदेश में बैठे साइबर ठगों को कमीशन पर बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे। जिसमें शेयर ट्रेडिंग और डीजिटल अरेस्टिंग की ठगी की गई रकम ट्रांसफर होती थी। आरोपी उसे कैश या हवाला के माध्यम से रुपये विदेश ट्रांसफर कर देते थे। साथ ही अन्य लोगों से संपर्क कर उनके नाम पर फर्म बैंक खाता और सिम खोलकर ठगों को देते थे। आरोपियों के अकाउंट में दो करोड़ 20 लाख रुपये ट्रांसफर हुए हैं। मामले में पुलिस उनके साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि ग्रेटर नोएडा निवासी सूरजपुर निवासी दिलीप दास ने बताया कि इसी साल बीते माह छह फरवरी को उनके पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि पीड़ित के नाम पर एक सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल गैरकानूनी कामों में हो रहा है। फर्जी जांच और ऑनलाइन कोर्ट में पेश कर रकम वेरिफिकेशन पीड़ित से 1.29 करोड़ रुपये ठगों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए थे। जिसकी सबसे अधिक रकम 48.95 लाख रुपये दोनों के बैंक अकाउंट में गए थे। पुलिस ने जांच के बाद दोनों अलग-अलग स्थानों से पकड़ा है। जिनकी पहचना नरेंद्र सिंह (23) इंद्रेश सिंह (23) जनपद भिंड मध्यप्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में नरेंद्र ने बताया कि वह बॉयलोजी सब्जेक्ट में बीएसी कोर्स कर रहा है। वहीं इंद्रेश 12वीं पास होने के बाद आईटीआई कर रहा है। दोनों एक साल पहले दिल्ली पार्ट टाइम नौकरी करने के लिए आए थे। वहां पर उनकी जनपद भिंड गांव टिंगरी निवासी आकाश सिंह नाम के युवक से मुलाकात हुई। उसने दोनों के नाम दिल्ली में खाता चालू कराया। इसके बाद दोनों अन्य लोगों को इस तरह की ठगी में जोड़ने लगे थे। मामले में पुलिस दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी हैं। वहीं आरोपी आकाश के बारे में जानकारी निकाल रही है।
बरामद मोबाइल में बातचीत का मैसेज मिला
पुलिस ने दोनों से बरामद मोबाइल फोन जांच कराई। जिसमें ठगों से बातचीत की बात सामने आई है। वहीं आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से अन्य लोगों को जोड़ने में लगे हुए थे। वहीं पुलिस ने नरेंद्र को आगरा और इंद्रेश को मध्यप्रदेश से पकड़ा है। नरेंद्र आगरा घूमने के लिए गया हुआ था। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती है। कोई भी पुलिस सीबीआई, ईडी या अन्य एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी नहीं करती। अगर कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर डराता है और पैसे मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही किसी भी अनजान लिंक को खोलने से बचें और वॉट्सऐप या कॉल पर मिलने वाले निवेश ऑफर पर भरोसा न करें। अपनी आधार, पैन कार्ड या बैंक से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते ठगी को रोका जा सके।