स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: क्यों पूरी दुनिया पर पड़ रहा है इसका असर?
Mediawali news
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह एक “चोक पॉइंट” है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% गुजरता है।
Iran द्वारा इस मार्ग को बंद करने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है।
ईंधन महंगा, महंगाई का डोमिनो इफेक्ट
तेल की सप्लाई रुकने से सबसे पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आया है। इसका असर केवल ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में दिख रहा है।
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ट्रक, जहाज और विमान महंगे ईंधन पर चलते हैं
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हर उत्पाद की लागत और परिवहन खर्च बढ़ रहा है
इससे आम लोगों को “डबल झटका” लग रहा है—ईंधन भी महंगा और रोजमर्रा की चीजें भी।
खाने-पीने की चीजों पर असर
खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आने की आशंका सबसे ज्यादा है। खासकर जल्दी खराब होने वाले सामान प्रभावित होंगे।
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दूध, फल, सब्जियां, मांस और मछली महंगे हो सकते हैं
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उर्वरक (यूरिया) की सप्लाई प्रभावित होने से खेती की लागत बढ़ेगी
मिडिल ईस्ट से दुनिया का लगभग 35% यूरिया और 20% से ज्यादा उर्वरक आता है, जो अब प्रभावित हो रहा है। इसका असर आने वाले महीनों में फसल और खाद्य कीमतों पर दिख सकता है।
हीलियम और मेडिकल सेक्टर पर असर
Qatar दुनिया का एक बड़ा हीलियम उत्पादक है और इसकी सप्लाई भी इसी मार्ग से होती है।
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सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण प्रभावित हो सकता है
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MRI जैसी मेडिकल मशीनों के संचालन की लागत बढ़ सकती है
पहले से चल रही हीलियम की कमी अब और गंभीर हो सकती है, जिससे टेक्नोलॉजी और हेल्थ सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा।
एल्युमिनियम, गैस और निर्माण लागत
मिडिल ईस्ट से आने वाला कच्चा एल्युमिनियम और प्राकृतिक गैस भी प्रभावित हो रही है।
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एल्युमिनियम महंगा होने से निर्माण कार्य की लागत बढ़ेगी
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यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं
इसका असर घर बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री पर पड़ेगा, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ेगा।
प्लास्टिक, केमिकल और दवाइयों पर असर
कच्चे तेल से बनने वाले उत्पाद जैसे प्लास्टिक, रेजिन और केमिकल्स भी महंगे हो रहे हैं। नैफ्था जैसे केमिकल की कमी से पेंट, क्लीनर और पैकेजिंग इंडस्ट्री प्रभावित होगी।
भारत, जो जेनेरिक दवाइयों का बड़ा निर्यातक है, वहां भी असर दिख सकता है। हवाई मार्ग प्रभावित होने से सप्लाई में देरी हो रही है, जिससे भविष्य में दवाइयों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
आगे क्या?
यह संकट केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
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महंगाई और सप्लाई चेन संकट गहराने की आशंका
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आम लोगों की जेब पर सीधा असर
अगर स्थिति लंबी चली, तो इसका प्रभाव हर देश और हर घर तक महसूस होगा।