लोकसभा में अमित शाह का बयान: “धर्म के आधार पर मुस्लिम आरक्षण गैर-संवैधानिक”

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Mediawali news
लोकसभा में गुरुवार को आरक्षण के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने स्पष्ट रूप से कहा कि धर्म के आधार पर मुस्लिमों को किसी भी प्रकार का आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान किसी भी नागरिक को केवल धर्म के आधार पर आरक्षण देने की अनुमति नहीं देता।

अमित शाह ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि आरक्षण का प्रावधान सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए किया गया है, न कि किसी विशेष धर्म के लिए। उन्होंने कहा, “संविधान निर्माताओं ने आरक्षण का आधार सामाजिक पिछड़ापन रखा था, न कि धार्मिक पहचान।”

गृह मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे वोट बैंक की राजनीति के तहत धर्म आधारित आरक्षण की मांग को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी मांगें न केवल संविधान की भावना के खिलाफ हैं, बल्कि देश की एकता और सामाजिक समरसता को भी प्रभावित कर सकती हैं।

इस दौरान उन्होंने Constitution of India का हवाला देते हुए कहा कि इसमें समानता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है, और राज्य को धर्म के आधार पर भेदभाव करने से रोका गया है। उन्होंने अनुच्छेद 15 और 16 का उल्लेख करते हुए बताया कि ये प्रावधान केवल सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष व्यवस्था की अनुमति देते हैं।

विपक्ष के कुछ सांसदों ने इस बयान का विरोध किया और कहा कि कुछ राज्यों में मुस्लिम समुदाय को पिछड़े वर्गों के तहत आरक्षण दिया गया है, जो उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए है। इस पर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि यदि कोई समुदाय सामाजिक रूप से पिछड़ा है, तो उसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत लाभ मिल सकता है, लेकिन केवल धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

इस मुद्दे पर सदन में हंगामे के बीच बहस जारी रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा और भी गर्मा सकता है।

Anjali Priya
Anjali Priya
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