जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर की बैठक संपन्न
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जनपद में अवैध नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय कक्ष में नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य नशे के अवैध स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना रहा।
प्रवर्तन कार्रवाई की समीक्षा
बैठक के दौरान विगत माह में अवैध नशे के खिलाफ की गई प्रवर्तन कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की गई। समाज कल्याण विभाग, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), जीएसटी, आबकारी विभाग, पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई।
अधिकारियों ने छापेमारी, जब्ती और नियंत्रण उपायों से संबंधित रिपोर्ट साझा करते हुए अवैध नशे के नेटवर्क पर की गई कार्रवाई का विवरण दिया।
सख्त कार्रवाई और समन्वय पर जोर
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध नशे के कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए सतत निगरानी और संयुक्त अभियान अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने सूचना तंत्र को और मजबूत करने तथा खुफिया सूचनाओं के आधार पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
बैठक में जिलाधिकारी ने आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जनपद में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिससे लोग नशे से दूर रहें और समाज में इसके खिलाफ सकारात्मक संदेश पहुंचे।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वहन करने के निर्देश दिए।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस बैठक में जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार, एसीपी कल्पना गुप्ता, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी सतीश कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह, एनसीबी से नरेंद्र खारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनपद को नशामुक्त बनाना और युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से बचाना है। इसके लिए प्रशासन द्वारा सख्त प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।