बंगाल चुनाव में हिंसा: नाओदा में TMC-AJUP समर्थकों के बीच झड़प, हालात तनावपूर्ण

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Mediawali news 

पश्चिम बंगाल में 152 सीटों पर मतदान के बीच मुर्शिदाबाद जिले का नाओदा इलाका एक बार फिर चुनावी हिंसा का केंद्र बन गया। शिवनगर गांव में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के समर्थकों के बीच तीखी झड़प हुई, जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया।

मतदान के दौरान भड़की हिंसा

जानकारी के अनुसार, मतदान के दौरान दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और पत्थरबाजी, लाठीचार्ज तथा वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि बाद में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप कर हालात को काबू में किया।

हुमायूं कबीर के गंभीर आरोप

AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने TMC पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को पैसे देकर चुनाव मैदान से हटाया गया। कबीर के मुताबिक, पहले उनकी पार्टी के 142 उम्मीदवार थे, जो अब घटकर 115 रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों को 9 लाख से 30 लाख रुपये तक देकर चुनाव से बाहर किया गया।

‘वापस जाओ’ के नारे और बढ़ा तनाव

जब हुमायूं कबीर शिवनगर के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो TMC समर्थकों ने उनके खिलाफ “वापस जाओ” के नारे लगाए।
उन्हें भाजपा एजेंट कहकर भी निशाना बनाया गया, जिससे माहौल और ज्यादा गर्म हो गया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के आरोप

AJUP कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि TMC समर्थकों ने उनके एक बूथ स्तर के अध्यक्ष के साथ मारपीट की।
हालांकि, मौके पर मौजूद केंद्रीय सुरक्षा बलों ने स्थिति को संभाल लिया और किसी बड़े नुकसान को टाल दिया।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

हुमायूं कबीर, जो पहले भरतपुर सीट से विधायक रह चुके हैं, ने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है और वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए मंदिर निर्माण और धार्मिक नेताओं को अनुदान दिया जा रहा है। नाओदा की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि सुरक्षा बलों की तत्परता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती हैं।

 

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