नेपाल बॉर्डर पर बढ़ी सख्ती, बिना आईडी के नहीं मिल रही एंट्री
भारत-नेपाल सीमा पर नए नियमों से बढ़ी परेशानी
Mediawali news
भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों सुरक्षा और कस्टम नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। नेपाल सरकार के नए नियमों का असर सीमावर्ती इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। सीमा पार आने-जाने वाले लोगों की संख्या कम हो गई है, वहीं दोनों देशों के बाजारों में भी कारोबार प्रभावित होने लगा है।
अब नेपाल में प्रवेश करने के लिए वैध पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना आईडी कार्ड के लोगों को सीमा से ही वापस लौटाया जा रहा है। इस सख्ती का सबसे ज्यादा असर मजदूरों, मरीजों और रोजाना सीमा पार करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
‘नो आईडी, नो एंट्री’ का नियम लागू
नेपाल सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सीमा पर जांच बढ़ा दी है। अब भारतीय नागरिकों को नेपाल में प्रवेश के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य वैध पहचान पत्र दिखाना जरूरी हो गया है। कई मामलों में आधार या पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी को भी मान्य नहीं माना जा रहा है। ऐसे लोगों को सीमा से वापस भेज दिया जा रहा है। नेपाल सरकार के इस फैसले के बाद सीमावर्ती इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों देशों के बीच वर्षों पुराने “रोटी-बेटी” के रिश्ते पर इसका असर पड़ रहा है।
व्यापार और बाजारों पर पड़ा असर
सीमा पर सख्ती का असर व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है। पहले बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत के सीमावर्ती बाजारों में खरीदारी करने आते थे, लेकिन अब ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। साथ ही नेपाल में सामान ले जाने वालों की भी कड़ी जांच हो रही है। कस्टम नियमों के कारण कई बार सामान जब्त किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि दोनों देशों के बाजारों में कारोबार घट गया है और दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मरीजों और परिवारों को हो रही दिक्कत
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। बिहार और नेपाल सीमा से जुड़े कई परिवार ऐसे हैं, जिनके रिश्तेदार दोनों देशों में रहते हैं। पहले लोग आसानी से सीमा पार कर लेते थे, लेकिन अब हर व्यक्ति की जांच की जा रही है। इससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। नेपाल के बिराटनगर, लहान और धरान जैसे शहरों में बड़े अस्पताल और आंखों के इलाज के प्रसिद्ध केंद्र हैं। बिहार के सीमावर्ती जिलों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए नेपाल जाते हैं। लेकिन अब पहचान पत्र अनिवार्य होने से मरीजों और उनके परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बच्चों के लिए भी जरूरी हुए दस्तावेज
नेपाल सरकार ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। अब बच्चों को सीमा पार करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल का पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा। जिन परिवारों के पास बच्चों के जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें भी सीमा से वापस लौटाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक लागू किए गए इन नियमों से आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
सुरक्षा कारणों से बढ़ाई गई सख्ती
नेपाल के एपीएफ डीएसपी Sheetal Shrestha ने कहा कि यह अभियान सुरक्षा को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि सभी देशों से आने वाले लोगों के लिए पहचान सत्यापन जरूरी किया गया है। वहीं एसएसबी 52वीं वाहिनी अररिया के कार्यवाहक कमांडेंट PN Singh ने कहा कि सीमा क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हर आने-जाने वाले व्यक्ति की जांच के बाद ही सीमा पार करने की अनुमति दी जा रही है।