कानपुर: वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियां पूरी, समीक्षा
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कानपुर में 12 जुलाई को आयोजित होने वाले वृहद वृक्षारोपण महाअभियान की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शनिवार को सर्किट हाउस में प्रदेश शासन द्वारा जनपद के लिए नामित नोडल अधिकारी एवं प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन) डॉ. एम.के. षणमुग सुंदरम की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान की तैयारियों, पौधरोपण स्थलों की व्यवस्था, हरितिमा ऐप पर जियो-टैगिंग, पौधों की सुरक्षा और व्यापक जनभागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
नोडल अधिकारी ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर पौधरोपण होना है, वहां की जियो-टैगिंग समय पर हरितिमा ऐप पर अपलोड की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहे, बल्कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा, नियमित देखभाल और संरक्षण भी पूरी जिम्मेदारी के साथ सुनिश्चित किया जाए।
500 से अधिक स्थानों पर लगाए जाएंगे 35.84 लाख पौधे
बैठक में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद में 500 से अधिक चिन्हित स्थलों पर कुल 35 लाख 84 हजार 556 पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सभी विभागों को उनके निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष केवल सामान्य वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक से विकसित किए जाने वाले विशेष वन भी अभियान का हिस्सा होंगे।
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कानपुर में विकसित होंगे तीन मियावाकी फॉरेस्ट
बैठक में जानकारी दी गई कि कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की ओर से न्यू ट्रांसपोर्ट नगर फेस-2 योजना में लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र तथा ग्राम बिनगवां में लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में तीन मियावाकी फॉरेस्ट विकसित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा ग्राम मकसूदाबाद में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निर्मित स्टेडियम के निकट एक सघन वन तैयार किया जाएगा। इन चारों परियोजनाओं के अंतर्गत कुल 1 लाख 20 हजार 80 पौधों का रोपण किया जाएगा। नई तकनीक से तैयार किए जाने वाले इन वनों का उद्देश्य कम क्षेत्र में अधिक घनत्व वाले जंगल विकसित करना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
अमृत सरोवर, मंदिर और नदियों के किनारे भी होगा पौधरोपण
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जैन ने बताया कि इस बार वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत अमृत सरोवरों, पौराणिक स्थलों, प्राचीन मंदिरों, नदियों और नहरों के किनारों, सरकारी परिसरों तथा निजी संस्थानों में भी बड़े स्तर पर पौधरोपण कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभियान में आम नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण से जुड़ सकें।
पनकी गोआश्रय स्थल पर बनेगा विशेष मियावाकी वन
नगर निगम के उद्यान अधिकारी दिवाकर ने बैठक में जानकारी दी कि पनकी गोआश्रय स्थल में भी मियावाकी पद्धति से विशेष वन विकसित किया जाएगा। इसके लिए भूमि का चयन कर लिया गया है और निर्धारित क्षेत्र में सघन पौधरोपण कराया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य गोआश्रय स्थल के वातावरण को अधिक हरित बनाना, पशुओं के लिए प्राकृतिक छाया उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
किसानों से भी जुड़ने की अपील
नोडल अधिकारी डॉ. एम.के. षणमुग सुंदरम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान से किसानों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि किसान अपने खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधे लगाएं। इससे खेतों की सुरक्षा, मिट्टी का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। जिला उद्यान अधिकारी उमेश कुमार उत्तम ने बताया कि किसानों को पौधरोपण के लिए जागरूक करने और उनकी सहभागिता बढ़ाने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।
पौधारोपण के बाद संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने और बड़े वृक्ष बनने से तय होगी। इसलिए प्रत्येक विभाग को पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा, निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जैन, प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी आकांक्षा जैन, परियोजना निदेशक डीआरडीए आलोक कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह, डीपीआरओ मनोज कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिला प्रशासन का कहना है कि व्यापक जनसहभागिता और सभी विभागों के समन्वय से इस बार का वृक्षारोपण महाअभियान कानपुर में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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