बारंडा पंचायत में 4.16 लाख रुपये के गबन का मामला, ग्राम प्रधान, सचिव समेत पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज
Tags: Bilhaur Police, Development Fund Scam, UP Panchayat Newsबिल्हौर की बारंडा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप, जांच में सामने आया 4.16 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा
Mediawali news, कानपुर
कानपुर जिले के बिल्हौर विकासखंड की बारंडा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। संयुक्त जांच में करीब 4.16 लाख रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद ग्राम प्रधान, तत्कालीन सचिव, तकनीकी सहायक समेत पांच लोगों के खिलाफ बिल्हौर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों को लेकर शिकायत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई कार्य कागजों में पूरे दिखाकर सरकारी धन निकाल लिया गया, जबकि जमीन पर काम या तो अधूरा था या हुआ ही नहीं। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई।
सीडीओ के निर्देश के बाद भी एक माह तक नहीं हुई कार्रवाई
बताया गया कि संयुक्त जांच रिपोर्ट आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अनुभव जे. जैन ने दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद करीब एक महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में सीडीओ ने अधिकारियों से नाराजगी जताई और कार्रवाई में हो रही देरी पर फटकार लगाई। इसके बाद खंड विकास अधिकारी नेमचंद्र ने बिल्हौर थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया।
जांच में कई विकास कार्यों में मिली अनियमितता
जांच के दौरान ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की पड़ताल की गई। इनमें नाला निर्माण, पौधरोपण, भूमि समतलीकरण और गौशाला से जुड़े निर्माण कार्य शामिल थे। जांच टीम ने संबंधित कार्यों के अभिलेख और भुगतान से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन समय पर सभी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे अधिकारियों को अनियमितता की आशंका और गहरी हो गई। बाद में मौके पर जाकर विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन भी किया गया।
गौशाला में गोट शेड निर्माण पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गौशाला में गोट शेड (पशु शेड) निर्माण के नाम पर सरकारी भुगतान दिखाया गया था। लेकिन जिन लाभार्थियों के नाम पर यह भुगतान किया गया, उन्होंने जांच टीम को बताया कि उन्होंने शेड का निर्माण अपने खर्च से कराया था। इससे भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।
भूमि समतलीकरण के दावे की खुली पोल
भूमि समतलीकरण के नाम पर भी सरकारी धन खर्च दिखाया गया था। लेकिन जब जांच टीम मौके पर पहुंची तो जिस स्थान पर समतलीकरण का दावा किया गया था, वहां आलू की फसल खड़ी मिली। इससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि जिस कार्य के लिए भुगतान किया गया, वह वास्तव में नहीं कराया गया था या रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई।
संयुक्त जांच में 4.16 लाख रुपये के गबन की पुष्टि
पूरे मामले की संयुक्त जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में कुल 4,16,608 रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन की पुष्टि की गई। रिपोर्ट प्रशासन को सौंपे जाने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
प्रशासन की ओर से बिल्हौर थाने में जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, उनमें—
- ग्राम प्रधान राजेश कुमार पाल
- तत्कालीन ग्राम सचिव समीर गुप्ता
- तकनीकी सहायक बलवीर
- रामकिशन
- प्रमोद कुमार
शामिल हैं। इन सभी पर सरकारी धन के दुरुपयोग और विकास कार्यों में अनियमितता करने के आरोप लगाए गए हैं।
सरकारी धन की होगी वसूली
परियोजना निदेशक आलोक कुमार ने बताया कि संयुक्त जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आई है, उनसे सरकारी धन की वसूली भी की जाएगी। इसके साथ ही विभागीय नियमों के अनुसार अन्य कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि पंचायतों में विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। यदि किसी भी स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने शुरू की जांच
बिल्हौर थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट का अध्ययन करेगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और अन्य लोगों से भी पूछताछ की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यह मामला पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी और सरकारी धन के सही उपयोग को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।