गौतमबुद्धनगर में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” का भव्य आयोजन, शिवालयों में गूंजे भजन और अनुष्ठान
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ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेशभर में आयोजन
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार Somnath Temple पर हुए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष और मंदिर के पुनरुद्धार के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” का आयोजन पूरे प्रदेश में श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इसी क्रम में गौतमबुद्धनगर जनपद में भी यह पर्व भव्यता और गरिमा के साथ मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
शिवालयों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
जनपद के सभी विकास खंडों और तहसीलों के अंतर्गत स्थित शिव मंदिरों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें भजन संध्या, रुद्राभिषेक, महाआरती, प्रवचन और दीपोत्सव जैसे आयोजन शामिल रहे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था और उत्सव का माहौल बना रहा।
सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान का संदेश
इन आयोजनों के माध्यम से भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आस्था और स्वाभिमान को मजबूत करने का संदेश दिया गया। भजन संध्या और प्रवचनों में सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व और उसके पुनरुत्थान की गौरवगाथा को भी विस्तार से बताया गया, जिससे लोगों में अपनी संस्कृति और इतिहास के प्रति गर्व की भावना जागृत हुई।
लखनऊ से यात्रा का शुभारंभ
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने लखनऊ से 19 अप्रैल 2026 को “सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से होकर गुजरते हुए आगे बढ़ेगी।
गौतमबुद्धनगर से श्रद्धालुओं की सहभागिता
गौतमबुद्धनगर से भी इस यात्रा में श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित की गई। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. शिवाकांत द्विवेदी के नेतृत्व और जिला विकास अधिकारी शिव प्रताप परमेश के मार्गदर्शन में 18 अप्रैल 2026 को विकास भवन परिसर से 10 श्रद्धालुओं के दल को लखनऊ के लिए रवाना किया गया। यहां से वे आगे इस यात्रा में शामिल होकर गुजरात स्थित सोमनाथ के लिए प्रस्थान करेंगे।
शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण आयोजन
पूरे जनपद में कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए। इस दौरान जनसामान्य में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी और अधिक सुदृढ़ किया।