भारत का अमेरिका को स्पष्ट जवाब: बासमती चावल का निर्यात, डंपिंग का सवाल ही नहीं
नई दिल्ली। भारत ने अमेरिकी बाजार में चावल की डंपिंग के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका को मुख्य रूप से महंगा बासमती चावल निर्यात करता है, न कि सस्ता गैर-बासमती चावल। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ऐसे में भारतीय चावल के खिलाफ डंपिंग का कोई आधार नहीं बनता।
सोमवार को नवंबर महीने के व्यापार आंकड़ों पर बातचीत करते हुए अग्रवाल ने बताया कि भारत के कुल चावल निर्यात में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बासमती चावल का है, जो एक जीआई (भौगोलिक संकेतक) उत्पाद है। अमेरिका को गैर-बासमती सफेद चावल का निर्यात बेहद सीमित मात्रा में किया जाता है।
पहले से 50% शुल्क लागू
अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका में भारतीय चावल पर पहले से ही करीब 50 प्रतिशत सीमा शुल्क लागू है। इसके बावजूद भारत का निर्यात जारी है क्योंकि बासमती चावल एक प्रीमियम उत्पाद है और इसकी कीमत सामान्य चावल की तुलना में काफी अधिक होती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीय बासमती चावल की कीमतें घरेलू या अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कम नहीं हैं, इसलिए डंपिंग का प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।
कोई डंपिंग जांच शुरू नहीं
वाणिज्य सचिव ने साफ किया कि अब तक अमेरिका की ओर से भारतीय चावल के खिलाफ किसी भी तरह की डंपिंग जांच शुरू नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पूरी तरह पालन करता है और निष्पक्ष व्यापार में विश्वास रखता है।
ट्रंप के बयान के बाद सफाई
गौरतलब है कि दिसंबर की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत को अमेरिकी बाजार में चावल “डंप” नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर शुल्क के जरिए इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा। ट्रंप के बयान के बाद भारतीय चावल पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई थीं।
भारत सरकार का कहना है कि बासमती चावल की ऊंची कीमत और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता को देखते हुए डंपिंग का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है।