आरबीआई का नया नियम, अब बैंक मुनाफे का सीमित हिस्सा ही दे सकेंगे डिविडेंड
Mediawali news
देश के बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए Reserve Bank of India (आरबीआई) ने डिविडेंड यानी लाभांश से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब बैंक अपने कुल मुनाफे का अधिकतम 75 प्रतिशत ही अपने शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में दे सकेंगे। आरबीआई का मानना है कि इससे बैंक अपनी पूंजी को ज्यादा सुरक्षित रख पाएंगे और भविष्य में किसी आर्थिक जोखिम का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे।
आरबीआई द्वारा जारी यह नया फ्रेमवर्क वित्त वर्ष 2026–27 से लागू होगा। इसके साथ ही नवंबर 2025 में जारी पुराने दिशानिर्देशों को बदल दिया जाएगा। यह नियम केवल बड़े कमर्शियल बैंकों पर ही नहीं बल्कि स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक और रीजनल रूरल बैंक जैसे सभी प्रकार के बैंकों पर लागू होगा।
नए नियमों के अनुसार किसी भी बैंक का डिविडेंड पेआउट रेशियो उसके प्रॉफिट आफ्टर टैक्स यानी कर के बाद होने वाले मुनाफे का 75 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। इसका मतलब यह है कि यदि कोई बैंक बहुत ज्यादा मुनाफा भी कमाता है, तब भी वह अपने शेयरधारकों को 75 प्रतिशत से अधिक डिविडेंड नहीं दे सकेगा। बाकी रकम बैंक को अपनी पूंजी और वित्तीय मजबूती के लिए सुरक्षित रखनी होगी। आरबीआई ने डिविडेंड तय करने के तरीके में भी बदलाव किया है। अब इसके लिए “एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स” यानी Adjusted PAT का नया फॉर्मूला लागू किया गया है। इस फॉर्मूले के तहत बैंक को पहले अपने नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स यानी खराब हो चुके कर्ज का 50 प्रतिशत अपने मुनाफे से घटाना होगा। इसके बाद जो रकम बचेगी, उसी के आधार पर डिविडेंड देने की अनुमति होगी।
यहां उल्लेखनीय है कि बैंकिंग क्षेत्र में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स यानी Non-Performing Asset (एनपीए) एक बड़ा मुद्दा रहा है। जब कोई कर्ज लंबे समय तक वापस नहीं आता तो उसे एनपीए माना जाता है। आरबीआई का कहना है कि डिविडेंड तय करते समय एनपीए को शामिल करने से बैंकों को अपने जोखिम को ध्यान में रखते हुए पूंजी बचाकर रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा आरबीआई ने बैंकों के लिए एक और नियम तय किया है। जो बैंक डिविडेंड घोषित करेंगे, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दो सप्ताह के भीतर आरबीआई के डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन को देनी होगी। यदि कोई बैंक इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो आरबीआई उसके डिविडेंड भुगतान पर रोक लगा सकता है और आवश्यक कार्रवाई भी कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बैंकिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी और मजबूत बनेगी। साथ ही बैंकों को भविष्य के आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त पूंजी सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।