2011 से पूर्व सेवारत शिक्षकों पर TET अनिवार्यता के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन
बीआरसी बिल्हौर परिसर में तीन दिवसीय आंदोलन की शुरुआत
कानपुर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2011 से पूर्व सेवारत शिक्षकों पर टीईटी (TET) अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर सोमवार को बीआरसी बिल्हौर परिसर में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन तीन दिवसीय विरोध कार्यक्रम का हिस्सा है।
ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने टीईटी अनिवार्यता को “काला कानून” बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई।
बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद
प्रदर्शन में धर्मेंद्र कटियार, उपाध्यक्ष कमलेश वर्मा, कोषाध्यक्ष चंद्रशेखर कुरिल, नियाज अहमद, साधना भारद्वाज, आरती, अजिता शाक्य, सुनीता प्रसाद, अर्चना मिश्रा, रीता कुमारी, अरविंद कुमार, सुमन यादव और निशात अफरोज सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
26 फरवरी को पैदल मार्च का ऐलान
ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि प्रांतीय निर्देश के क्रम में 26 फरवरी को जिले के सभी ब्लॉकों के शिक्षक बीएसए कार्यालय, कानपुर से पैदल मार्च निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचेंगे। वहां माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कानपुर नगर को सौंपा जाएगा। ज्ञापन में सेवारत शिक्षकों से टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी।
दिल्ली में बड़े आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के निर्देश पर मार्च के दूसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल आंदोलन किया जाएगा। संघ का दावा है कि इसमें देशभर के लगभग 20 लाख प्रभावित शिक्षक और उनके परिवारजन शामिल हो सकते हैं।