नोएडा की दो सोसायटी में बिल्डर को हैंडओवर के निर्देश

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एनसीएलएटी का अहम फैसला, वर्षों से चले आ रहे विवाद पर लगा विराम

नोएडा की दो प्रमुख आवासीय सोसायटियों—सेक्टर-137 स्थित सुपरटेक ईकोसिटी और सेक्टर-34 स्थित सुपरटेक पवेलियन—के निवासियों को बड़ी राहत मिली है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर सोसायटियों का पूरा हैंडओवर अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) को सौंपे। यह आदेश सोमवार को हुई सुनवाई के बाद पारित किया गया। लंबे समय से अधूरी सुविधाओं, रखरखाव विवाद और बिल्डर की मनमानी से जूझ रहे निवासियों ने इस फैसले को अपनी सामूहिक जीत बताया है।

एओए की लंबी कानूनी लड़ाई को मिली सफलता

सुपरटेक ईकोसिटी और पवेलियन सोसायटी में एओए का गठन काफी पहले हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद बिल्डर ने रखरखाव और सुविधाओं का औपचारिक हैंडओवर नहीं किया। निवासियों का आरोप था कि सोसायटी में कई बुनियादी सुविधाएं अधूरी थीं और रखरखाव एजेंसी वाईजी एस्टेट द्वारा गंभीर अनियमितताएं की जा रही थीं। इसके अलावा आइएफएमएस (इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी) फंड के दुरुपयोग के आरोप भी लगातार सामने आ रहे थे।

इन समस्याओं से परेशान होकर एओए ने सितंबर में एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया। करीब पांच सुनवाइयों के बाद ट्रिब्यूनल ने यह स्पष्ट आदेश दिया कि सभी सुविधाएं 30 दिन के भीतर एओए को हस्तांतरित की जाएं। सुपरटेक ईकोसिटी में ही करीब दो हजार से अधिक परिवार रहते हैं, जो वर्षों से इस फैसले का इंतजार कर रहे थे।

सीआईआरपी के बीच आया फैसला, आईआरपी की रहेगी निगरानी

यह आदेश ऐसे समय आया है, जब सुपरटेक समूह कॉरपोरेट इंसोल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) से गुजर रहा है। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया है कि हैंडओवर के बाद भी सोसायटियों में इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की निगरानी बनी रहेगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता न हो और निवासियों के हित सुरक्षित रहें।

पहले भी हुआ था डीम्ड हैंडओवर का प्रयास

इससे पहले सुपरटेक ईकोसिटी में एओए ने डीम्ड हैंडओवर लेने की कोशिश की थी। एओए ने नई एजेंसियों का चयन कर लिया था और उनके कर्मचारी सोसायटी में व्यवस्था संभालने पहुंचे थे, लेकिन बिल्डर की ओर से उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। इस पर विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। बाद में एओए ने एनसीएलएटी में अपील दायर की, जिसके बाद अब यह ऐतिहासिक आदेश आया है।

निवासियों में खुशी, बताया ऐतिहासिक निर्णय

सुपरटेक पवेलियन के एओए अध्यक्ष नरेश पांडेय ने कहा कि यह निर्णय सोसायटी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उन्होंने कहा कि फ्लैट खरीदारों को वर्षों से पूरी सुविधाएं नहीं मिल रही थीं और अब एओए के हाथ में नियंत्रण आने से हालात सुधरेंगे। वहीं सुपरटेक ईकोसिटी के एओए अध्यक्ष ओम दत्त शर्मा ने इसे निवासियों की सामूहिक जीत बताया। उनके अनुसार, बिल्डर के नियंत्रण से आजादी मिलने के बाद सोसायटी में खुशी का माहौल है और लोगों ने इस फैसले का जश्न भी मनाया।

एनसीएलएटी का यह फैसला न केवल इन दोनों सोसायटियों के लिए बल्कि अन्य परियोजनाओं के निवासियों के लिए भी एक मिसाल माना जा रहा है।

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