तारिक रहमान का बड़ा फैसला: बांग्लादेशी सेना में शीर्ष स्तर पर फेरबदल, भारत में रहे डिफेंस एडवाइजर को वापस बुलाया
प्रधानमंत्री बनते ही लिए अहम रक्षा फैसले
बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पदभार संभालते ही सेना में बड़े स्तर पर फेरबदल कर दिए हैं। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने सैन्य नेतृत्व में बदलाव कर नई रणनीतिक दिशा देने के संकेत दिए हैं। इन फैसलों को नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद सबसे अहम रक्षा कदम माना जा रहा है।
भारत में तैनात डिफेंस एडवाइजर की वापसी
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन में डिफेंस एडवाइजर के रूप में तैनात ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हफीजुर रहमान को वापस बुला लिया है। उन्हें मेजर जनरल के पद पर प्रमोट कर 55वीं इन्फैंट्री डिवीजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) नियुक्त किया गया है। इस कदम को बांग्लादेश की सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
टॉप लेवल पर कई नियुक्तियां और प्रमोशन
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री रहमान के निर्देश पर सेना के कई प्रमुख रणनीतिक कमांड और खुफिया एजेंसियों में भी बदलाव किए गए हैं।
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लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड (ARTDOC) से हटाकर चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) नियुक्त किया गया है।
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वे लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम की जगह लेंगे, जिन्होंने हाल ही में रिटायरमेंट लीव ली है।
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मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को प्रमोशन के बाद डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) का डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया गया है।
चुनावी जीत के बाद सत्ता में आई BNP सरकार
तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 12 फरवरी को हुए चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। इसके बाद 17 फरवरी को तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही मुहम्मद यूनुस का 18 महीने का शासन समाप्त हो गया।
रणनीतिक बदलावों के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि सेना और खुफिया एजेंसियों में यह बड़ा फेरबदल नई सरकार की प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय रणनीति में संभावित बदलाव की ओर संकेत करता है। खासकर भारत में रहे डिफेंस एडवाइजर को वापस बुलाने को दक्षिण एशिया की कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई सरकार के इन फैसलों से आने वाले दिनों में बांग्लादेश की रक्षा नीति और विदेश नीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।