नोएडा में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना बना सिरदर्द, महीनों का इंतजार मजबूरी
नोएडा में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना बना बड़ी चुनौती
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब केवल वाहन चलाने की योग्यता का परीक्षण नहीं रह गई है, बल्कि यह आम नागरिकों के धैर्य और मजबूरी की भी परीक्षा बन चुकी है। तकनीकी खामियों और सीमित स्लॉट के कारण सैकड़ों लोग महीनों से लर्निंग और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए इंतजार कर रहे हैं। नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह समस्या लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
तकनीकी खामियां और सीमित स्लॉट बनी परेशानी
एआरटीओ नोएडा कार्यालय में उन आवेदकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनके आवेदन में तकनीकी त्रुटियां दर्ज हो गई हैं। इन त्रुटियों के सुधार के लिए शासन स्तर पर रोजाना केवल दो स्लॉट निर्धारित किए गए हैं, जबकि ऐसे मामलों की संख्या प्रतिदिन 150 से अधिक पहुंच रही है। इसके चलते लोगों को मई और जून तक की तारीखें दी जा रही हैं।
सेकेंडों में भर जाते हैं स्लॉट, लोग घंटों इंतजार में
आवेदकों का कहना है कि जैसे ही पोर्टल पर स्लॉट खुलते हैं, वे कुछ ही सेकेंड में भर जाते हैं। कई लोग घंटों मोबाइल या कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं, फिर भी स्लॉट बुक नहीं हो पाता। इससे नौकरीपेशा लोग, डिलीवरी कर्मचारी, टैक्सी और ऑटो चालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
रोजगार और सड़क सुरक्षा पर असर
लाइसेंस न होने की स्थिति में न केवल लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है, बल्कि चालान और कानूनी कार्रवाई का डर भी बना रहता है। कई लोग मजबूरी में बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने को विवश हैं, जिससे सड़क सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्लॉट की संख्या बढ़ाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह निर्णय मुख्यालय तथा शासन स्तर पर लिया जाना है।
उप संभागीय परिवहन अधिकारी नंद कुमार ने बताया कि तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे आवेदकों को यथासंभव सहायता दी जा रही है और शासन को स्थिति से अवगत कराया गया है।