मोदी बोले– सोमनाथ तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमटे, आज भी मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें मौजूद

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पीएम ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में कहा– आक्रांताओं ने भारत को मिटाने की कोशिश की, न सोमनाथ नष्ट हुआ न हिंदुस्तान

सोमनाथ (गुजरात)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर 1000 साल पहले हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने वाले आज इतिहास के पन्नों में सिमट चुके हैं, जबकि सोमनाथ आज भी पूरी शान के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि उस समय आतताइयों को लगा था कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर पर फहराती ध्वजा भारत की सनातन शक्ति और सांस्कृतिक दृढ़ता का प्रमाण है। पीएम मोदी ने अफसोस जताया कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने कभी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर सद्भावना ग्राउंड में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। यह कार्यक्रम मंदिर पर पहले आक्रमण के 1000 साल और उसके पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था।

नेहरू का नाम लिए बिना दिया ऐतिहासिक संदर्भ

पीएम मोदी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम लिए बिना कहा कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली थी, तब उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं।

पीएम मोदी के संबोधन की 4 बड़ी बातें

1. सोमनाथ का वजूद नहीं मिटा पाए आक्रांता:
पीएम ने कहा कि 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा और सोचा कि उसने इसका अस्तित्व खत्म कर दिया, लेकिन इसके बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। बाद में खिलजी ने भी इसे तोड़ा, फिर जूनागढ़ के राजाओं ने इसे दोबारा खड़ा किया।

2. न मंदिर नष्ट हुआ, न भारत:
मोदी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सदियों तक भारत को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन न सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत की सभ्यता।

3. मजहबी कट्टरता विफल रही:
प्रधानमंत्री ने कहा कि आक्रांताओं को लगा कि उनकी तलवारें सनातन को मिटा देंगी, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ के नाम में ही ‘सोम’ यानी अमृत जुड़ा है, जो अमरता का प्रतीक है।

4. आज भी सतर्क रहने की जरूरत:
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता वाले लोग हमारी विरासत को भूलाने की कोशिश करते रहे। आज भी ऐसी ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है, जो समाज को बांटना चाहती हैं।

मंदिर में पूजा-अर्चना

प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह सोमनाथ मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। पीएम शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आस्था, आत्मविश्वास और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जो हर दौर में देश को दिशा देता रहा है।

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