ओवैसी का दावा– हिजाब पहनने वाली बेटी बनेगी भारत की प्रधानमंत्री, भाजपा नेताओं का पलटवार

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सोलापुर रैली में ओवैसी का बयान, नितेश राणे बोले– हिंदू राष्ट्र में संभव नहीं; हिमंत सरमा ने भी जताया भरोसा

नई दिल्ली/सोलापुर।


AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने कहा है कि एक दिन भारत में हिजाब पहनने वाली बेटी प्रधानमंत्री बनेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, लेकिन ऐसी राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलेगी।

ओवैसी ने यह बयान शुक्रवार को महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के संविधान में लिखा है कि सिर्फ एक ही धर्म का व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन बाबा साहेब आंबेडकर का संविधान कहता है कि कोई भी भारतीय नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है।” ओवैसी ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, चाहे उनका धर्म या पहनावा कुछ भी हो।

भाजपा नेताओं का तीखा जवाब


ओवैसी के इस बयान पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ओवैसी हिंदू राष्ट्र में इस तरह के बयान नहीं दे सकते। राणे ने कहा, “जो लोग ऐसे पदों पर बैठना चाहते हैं, उन्हें इस्लामिक देशों में जाना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

वहीं भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी ओवैसी को घेरा। उन्होंने कहा कि संविधान किसी को प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोकता, लेकिन ओवैसी को पहले अपनी पार्टी में पसमांदा या हिजाब पहनने वाली महिला को अध्यक्ष बनाकर दिखाना चाहिए।

हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणी


असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन भारत एक हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति वाला देश है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा एक हिंदू ही होगा।

नफरत की राजनीति पर हमला


ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि जो लोग मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं, उनका अंत तय है। उन्होंने कहा कि जब समाज में प्यार आम होगा, तब लोगों को एहसास होगा कि किस तरह उनके दिमाग में जहर भरा गया था।

ओवैसी के बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं के बाद एक बार फिर संविधान, धर्म और सत्ता के सवाल पर सियासी बहस तेज हो गई है।

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