भारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों और कैदियों की सूचियों का आदान-प्रदान किया

Share your love

भारत और पाकिस्तान ने एक बार फिर आपसी समझौते के तहत परमाणु प्रतिष्ठानों और कैदियों की सूचियों का आदान-प्रदान किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद एक समझौते के प्रावधानों के अनुसार की गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह सूची आदान-प्रदान उस समझौते के तहत हुआ है, जिसमें परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं पर हमले को प्रतिबंधित किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों देश एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं को निशाना न बनाएं और क्षेत्र में सुरक्षा व स्थिरता बनी रहे।

इस प्रक्रिया के तहत भारत और पाकिस्तान हर साल एक निश्चित तारीख पर एक-दूसरे को अपनी परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची सौंपते हैं। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और इसे दोनों देशों के बीच विश्वास बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने अपने-अपने देशों की जेलों में बंद कैदियों की सूची भी साझा की है। इस सूची में ऐसे नागरिक और मछुआरे शामिल होते हैं, जो अनजाने में सीमा पार कर जाने या अन्य कारणों से गिरफ्तार हुए हैं। कैदियों की जानकारी साझा करने से उनके मामलों की समीक्षा करने और मानवीय आधार पर कदम उठाने में मदद मिलती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस तरह के कदम दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने में सहायक होते हैं, भले ही राजनीतिक संबंधों में तनाव क्यों न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित संवाद और समझौते क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी हैं।

विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत शांति और सुरक्षा के पक्ष में है और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन करता रहेगा। इस प्रकार के आदान-प्रदान से यह संदेश जाता है कि संवेदनशील मुद्दों पर भी नियमों और सहमति के तहत काम किया जा सकता है। कुल मिलाकर, परमाणु प्रतिष्ठानों और कैदियों की सूचियों का यह आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच भरोसा बनाए रखने और मानवीय पहलुओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

navya seth
navya seth
Articles: 281

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios
Work With Us