लोकसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त: कई अहम विधेयकों पर मुहर, तीखी नोकझोंक के बीच खत्म हुई कार्यवाही
नई दिल्ली। संसद का 19 दिवसीय शीतकालीन सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के साथ ही इस सत्र का औपचारिक समापन हो गया। सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा के बाद उन्हें पारित किया गया, वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक टकराव भी देखने को मिले।
92 घंटे से ज्यादा चली संसद की कार्यवाही
शीतकालीन सत्र के दौरान संसद की कुल कार्यवाही 92 घंटे 25 मिनट तक चली। इस दौरान सदन में 15 बैठकें हुईं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 111 प्रतिशत रही, जो एक रिकॉर्ड मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि सांसदों ने कई बार देर रात तक बैठकर महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।
कई महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित
इस सत्र में सरकार ने कई अहम विधेयकों को पारित कराया। इनमें 20 साल पुराने मनरेगा कानून को निरस्त करने वाला विधेयक और निजी क्षेत्र के लिए नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलने वाला विधेयक प्रमुख रहे। इसके अलावा आर्थिक सुधार, प्रशासनिक बदलाव और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों पर भी सदन की मुहर लगी।
लोकसभा अध्यक्ष का विदाई भाषण
शुक्रवार को कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपना संक्षिप्त विदाई भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह सत्र चर्चा, संवाद और निर्णयों के लिहाज से अहम रहा। उन्होंने सभी सांसदों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया और इसके बाद लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।
विपक्ष के नारे और सियासी माहौल
लोकसभा अध्यक्ष के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने ‘महात्मा गांधी की जय’ के नारे लगाए। इससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा, वहीं सरकार ने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
दो बड़ी राजनीतिक बहसें रहीं केंद्र में
शीतकालीन सत्र की 15 बैठकों में दो राजनीतिक रूप से संवेदनशील और लंबी बहसें हुईं।
पहली बहस ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस बहस पर 11 घंटे 32 मिनट तक चर्चा चली और 65 सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया।
दूसरी अहम बहस चुनाव सुधारों को लेकर हुई, जो करीब 13 घंटे तक चली। इसमें 63 सांसदों ने भाग लिया। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े नए कानून तथा ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
चुनाव आयोग पर बहस को लेकर टकराव
चुनाव सुधारों की बहस के दौरान विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि सदन में चुनाव आयोग के कार्य संचालन पर चर्चा नहीं की जा सकती। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
कुल मिलाकर, संसद का यह शीतकालीन सत्र महत्वपूर्ण विधायी फैसलों, लंबी बहसों और राजनीतिक टकरावों के बीच समाप्त हुआ, जिसने आने वाले समय के लिए सियासी संकेत भी दे दिए हैं।