दिल्ली–एनसीआर में हवा अब भी ज़हरीली, AQI 373 दर्ज; सुधार की उम्मीद नहीं

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दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता बुधवार सुबह भी बेहद खराब स्थिति में रही। थोड़ी गिरावट के बावजूद हवा अभी भी ज़हर से भरी हुई है। बुधवार सुबह 7 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 373 दर्ज किया गया, जो “गंभीर श्रेणी” में आता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सांस लेने की स्थिति अब भी खतरनाक बनी हुई है। दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण के स्तर में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन हवा की गुणवत्ता में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले सात दिनों में बारिश की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में प्रदूषण के कम होने की उम्मीद भी फिलहाल कम दिखाई दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण के मुख्य कारणों में वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुआँ, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और ठंड के मौसम में हवा की गति का धीमा होना शामिल है। हवा ठंडी होने से प्रदूषक जमीन के नज़दीक जमे रहते हैं, जिससे AQI लगातार खराब बना रहता है। इस बीच, इथियोपिया के ज्वालामुखी से उठे राख के गुबार को लेकर जो आशंका थी कि यह भारत की हवा को और ज़हरीला कर सकता है, वह गलत साबित हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही साफ कर दिया था कि यह राख ऊपरी वायुमंडल से गुजरेगी और इसका भारत की वायु गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बुधवार को यह स्पष्ट हो गया कि ज्वालामुखीय राख ने प्रदूषण में कोई अतिरिक्त योगदान नहीं दिया। फिर भी, हवा की स्थिति दिल्ली और आसपास के शहरों, जैसे गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाज़ियाबाद — में “बहुत खराब” से “गंभीर” श्रेणी के बीच बने रहने की संभावना है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की हवा बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। लोगों को बाहर कम निकलने, N95 मास्क का उपयोग करने और घरों में एयर प्यूरीफायर चलाने की सलाह दी गई है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की एजेंसियाँ प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए उपायों पर काम कर रही हैं, लेकिन फिलहाल हवा में कोई त्वरित सुधार की उम्मीद नहीं है।

navya seth
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