लालू परिवार विवाद: रोहिणी पर मांझी का निशाना— “बेटी का अपमान बिहार कभी स्वीकार नहीं करेगा”
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रही खींचतान अब सीधे राजनीतिक गर्माहट का रूप ले चुकी है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य के आरोपों के बाद बिहार में राजनीतिक पारा लगातार चढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव पर गंभीर सवाल खड़े किए और कहा कि “यह सिर्फ राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि बेहद दुखद मानवीय पहलू से जुड़ा मुद्दा है।”
मांझी का तेजस्वी पर सीधा हमला
मांझी ने कहा कि राबड़ी आवास से रोहिणी और उनकी बहनों का निकलना एक गहरी पारिवारिक दरार को दिखाता है। उन्होंने कहा,
“हमारे परिवारों में बेटियों को सबसे अधिक मान-सम्मान दिया जाता है, लेकिन तेजस्वी यादव ने किस परिस्थिति में ऐसा कदम उठाया — यह जांच का विषय होना चाहिए। बिहार की जनता बेटी के अपमान को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।”
मांझी ने यह भी दावा किया कि तेजस्वी यादव पहले अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव को दूर कर चुके हैं और अब बहन रोहिणी को घर से निकलवाया।
उन्होंने आरोप लगाया, “जिस बहन ने पिता के लिए अपनी किडनी तक दे दी, उसी पर गंदी किडनी देने और पैसे लेने जैसा अपमानजनक आरोप लगाया गया — यह बेहद शर्मनाक है।”
दिल्ली में मांझी की मुलाकात— NDA की जीत पर बधाई
इस विवाद के बीच जीतन राम मांझी ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर एनडीए की जीत पर शुभकामनाएं दीं। इस बैठक में भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े भी मौजूद रहे।
रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोप
बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद 14 नवंबर को रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि—
उन्हें गालियां दी गईं, चप्पल से मारा गया, चुनाव में हार के लिए उन्हें दोष दिया गया और यह तक कहा गया कि उन्होंने ‘गंदी किडनी’ लगवाई
उन्होंने तेजस्वी यादव, संजय यादव और रमीज पर उन्हें मायका छोड़ने पर मजबूर करने का आरोप लगाया।
रोहिणी ने भावुक शब्दों में लिखा कि परिवार को बचाने के लिए उन्होंने बहुत कुछ त्याग किया, लेकिन आज उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है।
राबड़ी आवास छोड़कर गईं चारों बहनें
16 नवंबर को रोहिणी के साथ चंदा, रागिणी और अन्य बहनें भी राबड़ी आवास छोड़कर चली गईं। पटना एयरपोर्ट पर रोहिणी ने बताया कि वह बेहद आहत हैं और उनके त्याग के बदले उन्हें अपमान मिला।