दिल्ली की भीषण गर्मी ने ली संजय लेक की जान! हजारों मछलियों की मौत से फैली बदबू, पर्यावरण पर बड़ा संकट

 ईस्ट दिल्ली की संजय लेक में जलस्तर गिरने और ऑक्सीजन की भारी कमी से मचा हाहाकार, स्थानीय लोगों ने उठाए DDA और प्रशासन पर सवाल

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Mediawali news, delhi

Sanjay_Lake में इन दिनों दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिल रहा है। राजधानी दिल्ली भीषण गर्मी और लगातार पड़ रही लू की चपेट में है, जिसका असर अब शहर के पर्यावरण और जल स्रोतों पर साफ दिखाई देने लगा है। पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में स्थित संजय लेक, जो कभी हरियाली, पक्षियों और शांत वातावरण के लिए जानी जाती थी, आज सैकड़ों मरी हुई मछलियों से पट चुकी है। झील के किनारों पर फैली सड़ चुकी मछलियां, हरे रंग का ठहरा हुआ पानी और सूखी दरारों वाली झील की सतह एक बड़े पर्यावरणीय संकट की तस्वीर पेश कर रही है। करीब 52 एकड़ में फैली यह झील दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा संचालित 187 एकड़ के विशाल पार्क का हिस्सा है। गर्मी के मौसम में जहां लोग यहां सुकून और ठंडक की तलाश में आते थे, वहीं अब यहां से उठ रही बदबू और गंदगी लोगों को परेशान कर रही है।

 

 जलस्तर गिरने से बिगड़े हालात

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से संजय लेक Sanjay_Lake में पानी का स्तर लगातार घट रहा था। झील में पानी की सप्लाई मुख्य रूप से कोंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से ट्रीटेड वॉटर पाइपलाइन के जरिए होती है। लेकिन हाल ही में पाइपलाइन में बड़े स्तर पर लीकेज सामने आने के बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया। इसी वजह से झील में पानी की सप्लाई लगभग बंद हो गई। गर्मी के कारण तेजी से हो रहे वाष्पीकरण और नई जल आपूर्ति बंद होने से झील का जलस्तर तेजी से नीचे चला गया। कई हिस्सों में पानी इतना कम हो गया कि मछलियां छोटे-छोटे गड्ढों में फंसकर रह गईं। पानी का प्रवाह रुकने से झील पूरी तरह ठहराव की स्थिति में पहुंच गई, जिससे पानी में विषैले तत्व बढ़ने लगे।

ऑक्सीजन की कमी बनी मौत की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक मछलियों की मौत का सबसे बड़ा कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन यानी Dissolved Oxygen का तेजी से कम होना है। जब तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है तो पानी की ऑक्सीजन धारण करने की क्षमता घट जाती है। दूसरी तरफ गर्मी में मछलियों का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है, जिससे उन्हें ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। संजय लेक में पानी कम होने के कारण सूरज की गर्मी सीधे पानी को और तेजी से गर्म कर रही है। ऐसे हालात में मछलियों के लिए जीवित रहना लगभग असंभव हो गया। झील की सफाई में लगे कर्मचारियों ने बताया कि पिछले 72 घंटों में करीब 2 से 3 क्विंटल मरी हुई मछलियां निकाली जा चुकी हैं। इनमें छोटी मच्छर खाने वाली मछलियों से लेकर तिलापिया और बड़ी कार्प प्रजाति की मछलियां शामिल हैं।

 पक्षियों और जैव विविधता पर भी खतरा

Sanjay_Lake केवल एक झील नहीं बल्कि दिल्ली के संरक्षित वन क्षेत्र का अहम हिस्सा मानी जाती है। यहां सालभर कई स्थानीय और प्रवासी पक्षी आते हैं। मछलियों की सामूहिक मौत ने अब पूरे वेटलैंड इकोसिस्टम को खतरे में डाल दिया है। स्थानीय मॉर्निंग वॉक करने वाले लोगों का कहना है कि यहां पहले बड़ी संख्या में पक्षी दिखाई देते थे, लेकिन अब बदबू और प्रदूषण के कारण उनका आना कम हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पक्षी सड़ी-गली और संक्रमित मछलियों को खाएंगे तो इससे उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। झील के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि मरी हुई मछलियों की वजह से इतनी तेज दुर्गंध फैल रही है कि पार्क में बैठना मुश्किल हो गया है। बुजुर्गों, बच्चों और परिवारों के लिए यह इलाका अब असहनीय बनता जा रहा है।

 प्रशासन पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई महीनों से झील के किनारों पर ढलान और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा काम चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद जलस्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाती तो इतने बड़े स्तर पर मछलियों की मौत रोकी जा सकती थी। अब लोग DDA और दिल्ली वन विभाग से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द झील में पानी छोड़ा जाए और ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने के लिए आपातकालीन कदम उठाए जाएं।

 दिल्ली की झीलों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि संजय लेक की यह घटना केवल एक झील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली की सभी शहरी झीलों और वेटलैंड्स के लिए चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन के कारण दिल्ली में गर्मियां लगातार लंबी और ज्यादा खतरनाक होती जा रही हैं। ऐसे में कृत्रिम और प्राकृतिक जल स्रोतों का प्रबंधन पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल प्रबंधन, पाइपलाइन मरम्मत और बैकअप जल आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले समय में राजधानी की कई अन्य झीलों में भी इसी तरह की पर्यावरणीय त्रासदी देखने को मिल सकती है।

 हीटवेव ने बढ़ाई चिंता

दिल्ली में इस समय तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मौसम विभाग पहले ही लू को लेकर अलर्ट जारी कर चुका है। ऐसे में संजय लेक जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि हीटवेव अब केवल इंसानों ही नहीं बल्कि पूरे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। संजय लेक में फैली यह तबाही राजधानी के पर्यावरण प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाता है।

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