जिलाधिकारी की पहल: श्रमिकों के लिए सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

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उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जनपद गौतमबुद्धनगर में श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने सेक्टर-27 नोएडा स्थित सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं निजी अस्पताल संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

औद्योगिक जिले में श्रमिकों की भूमिका और जरूरतें

जिलाधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्धनगर को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं और लाखों श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन स्तर को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।

निजी अस्पतालों की भागीदारी पर जोर

बैठक में जिलाधिकारी ने निजी अस्पताल संचालकों से अपील की कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस दिशा में उन्होंने निजी अस्पतालों को अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का उपयोग करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों, लेबर कॉलोनियों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर नियमित मेडिकल कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए।

महिला श्रमिकों के लिए विशेष सुविधाएं

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि मेडिकल कैंपों में महिलाओं के लिए अलग से सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की जांच को प्राथमिकता दी जाए, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सके।

मेडिकल कैंप और मोबाइल सेवाओं का विस्तार

बैठक में यह भी तय किया गया कि श्रमिक बहुल क्षेत्रों में मिनी ओपीडी, मोबाइल मेडिकल वैन और नेत्र जांच शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से श्रमिकों और उनके परिवारजनों को स्वास्थ्य जांच, चश्मा वितरण और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर कार्यरत श्रमिकों के लिए भी नियमित स्वास्थ्य जांच और मोबाइल मेडिकल सेवाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

समन्वय और माइक्रो प्लान की तैयारी

जिलाधिकारी ने सभी निजी अस्पतालों को निर्देशित किया कि वे स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार करें। प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उसकी सूची प्रशासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति

बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और निजी अस्पताल संचालकों से सुझाव भी लिए गए। इन सुझावों के आधार पर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय राणा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंदन सोनी सहित अन्य चिकित्सकगण उपस्थित रहे।

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