सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर Rahul Gandhi का बड़ा वादा, CAPF जवानों को मिलेगा ‘पूरा हक’
Mediawali news
सीआरपीएफ शौर्य दिवस के अवसर पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के जवानों को बड़ा भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो CAPF में लंबे समय से चली आ रही ‘भेदभावपूर्ण व्यवस्था’ को खत्म किया जाएगा। राहुल गांधी ने अपने संदेश में जवानों के साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि ये जवान सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ते हैं और चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजनों को भी सुरक्षित बनाते हैं।
प्रमोशन और नेतृत्व को लेकर उठाया मुद्दा
राहुल गांधी ने CAPF के भीतर प्रमोशन और नेतृत्व से जुड़े विवाद को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों की सेवा और समर्पण के बावजूद जवानों को समय पर पदोन्नति नहीं मिलती। इतना ही नहीं, उन्हें अपने ही बलों के शीर्ष पदों तक पहुंचने का अवसर भी नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई उच्च पद बाहरी अधिकारियों के लिए आरक्षित होते हैं, जिससे CAPF कर्मियों के साथ अन्याय होता है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार बनने पर इस व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा और जवानों को उनकी योग्यता के आधार पर नेतृत्व के अवसर दिए जाएंगे।
CAPF की भूमिका और संरचना
CAPF के तहत देश के सात प्रमुख अर्धसैनिक बल शामिल हैं, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं। इनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल्स शामिल हैं। इन बलों की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। देश की सुरक्षा व्यवस्था में इन बलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, खासकर संवेदनशील क्षेत्रों और आपात स्थितियों में।
नए विधायी ढांचे पर भी टिप्पणी
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद ने CAPF के संचालन के लिए एक नए यूनिफाइड लीगल फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है। इस नए ढांचे का उद्देश्य विभिन्न बलों के अलग-अलग सेवा नियमों को एक समान करना है। हालांकि, विपक्ष के कई नेताओं ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण बदलाव से पहले जवानों और अधिकारियों से व्यापक स्तर पर चर्चा की जानी चाहिए थी। कुछ नेताओं ने इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजने की भी मांग की थी।
राजनीतिक संदेश के साथ भविष्य की रूपरेखा
राहुल गांधी का यह बयान केवल एक आश्वासन नहीं, बल्कि CAPF सुधारों को लेकर कांग्रेस की संभावित नीति का संकेत भी माना जा रहा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता जवानों को सम्मान, अवसर और समान अधिकार देना होगा। इस बयान के जरिए कांग्रेस ने सुरक्षा बलों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और मौजूदा नीतियों पर सवाल उठाने की कोशिश की है।