Noida में मजदूरों का गुस्सा फूटा: सैलरी विवाद ने लिया उग्र रूप, सड़कों पर जाम और हंगामा
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उत्तर प्रदेश के नोएडा में इन दिनों मजदूरों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। पिछले एक हफ्ते से चल रहा यह विरोध अब काफी उग्र हो गया है। शुरुआत कपड़ा कारोबार से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन कई फैक्ट्रियों और कंपनियों तक फैल चुका है।
शहर के अलग-अलग औद्योगिक इलाकों—जैसे सेक्टर 62 से लेकर 66 और 82 तक- में हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। मजदूरों की मुख्य मांग है कि उनकी सैलरी बढ़ाई जाए, ओवरटाइम का सही पैसा मिले और काम करने की शर्तें बेहतर हों।
प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि कई जगहों पर हालात बेकाबू हो गए। कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में तोड़फोड़ की और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। NH-9 को पूरी तरह जाम कर दिया गया, जिससे करीब 5 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इसका असर गाजियाबाद और दिल्ली बॉर्डर तक देखने को मिला।
ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी करीब 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे, जिससे भीड़ को हटाया जा सके।
इस बीच प्रशासन ने हालात को शांत करने के लिए कदम उठाए हैं। जिले की डीएम मेधा रूपम ने औद्योगिक इकाइयों के साथ बैठक कर कुछ अहम निर्देश दिए हैं। इनमें ओवरटाइम का दोगुना पैसा देना, साप्ताहिक छुट्टी सुनिश्चित करना और बोनस समय पर देने जैसे फैसले शामिल हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर ध्यान दिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मजदूरों को समय पर और सम्मानजनक वेतन दिया जाए, ताकि असंतोष कम हो सके।
कुल मिलाकर, नोएडा में यह आंदोलन सिर्फ सैलरी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि अब यह मजदूरों के अधिकार और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर उद्योग और आम जनजीवन दोनों पर और ज्यादा पड़ सकता है।