कोहिनूर बयान पर विवादों में न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी
Mediawali news
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला ब्रिटेन के शाही परिवार और ऐतिहासिक कोहिनूर हीरे से जुड़ा है। कोहिनूर की वापसी की मांग को लेकर दिए गए बयान के बाद अब उन पर किंग चार्ल्स तृतीय के प्रति कथित तौर पर ‘रूखा’ व्यवहार करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
कोहिनूर को लेकर दिया था बयान
किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला के न्यूयॉर्क दौरे से पहले ममदानी ने कहा था कि यदि उन्हें अवसर मिला तो वे ब्रिटेन से कोहिनूर हीरे की वापसी का मुद्दा उठाएंगे। उन्होंने औपनिवेशिक दौर में भारत समेत कई देशों से ले जाई गई ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। ममदानी के इस बयान के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी। कई लोगों ने इसे औपनिवेशिक इतिहास से जुड़े सवालों को उठाने वाला कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनयिक शिष्टाचार के खिलाफ करार दिया।
9/11 स्मारक पर नहीं उठाया मुद्दा
हालांकि, जब किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला न्यूयॉर्क में 9/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे, तब ममदानी ने सार्वजनिक रूप से कोहिनूर का मुद्दा नहीं उठाया। इसके बावजूद अमेरिकी मीडिया के कुछ वर्गों ने उनके व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए। विशेष रूप से न्यूयॉर्क पोस्ट ने अपने संपादकीय में ममदानी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश सम्राट के स्वागत में अपेक्षित औपचारिकता और सम्मान नहीं दिखाया। अखबार ने उनके रवैये को “असभ्य” और “अनुचित” बताया।
औपनिवेशिक मुद्दों पर ‘अत्यधिक जोर’ का आरोप
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ममदानी अपने औपनिवेशिक मुद्दों और ऐतिहासिक बहसों को अलग नहीं रख पाए। आलोचकों का कहना है कि एक बड़े शहर के मेयर के रूप में उन्हें कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहिए था। मीडिया रिपोर्ट्स में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या ममदानी को भारत सरकार की ओर से इस तरह का मुद्दा उठाने का अधिकार है। हालांकि, ममदानी की ओर से इन आलोचनाओं पर फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कोहिनूर पर लंबे समय से जारी है विवाद
कोहिनूर हीरा लंबे समय से भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक और भावनात्मक बहस का विषय रहा है। भारत सहित कई लोग मानते हैं कि यह हीरा औपनिवेशिक काल में भारत से ले जाया गया था और इसे वापस किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, ब्रिटेन की ओर से अब तक इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। समय-समय पर कई भारतीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने कोहिनूर की वापसी की मांग उठाई है।
राजनीतिक और कूटनीतिक बहस तेज
ममदानी के बयान और उसके बाद हुए विवाद ने एक बार फिर औपनिवेशिक विरासत, सांस्कृतिक संपत्ति की वापसी और कूटनीतिक शिष्टाचार जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर आने वाले समय में अमेरिका और ब्रिटेन के राजनीतिक विमर्श में भी दिखाई दे सकता है।