कैश कांड के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, महाभियोग से पहले बड़ा कदम
Mediawali news
Yashwant Varma ने 10 अप्रैल 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र Droupadi Murmu को भेजा, जिसमें उन्होंने लिखा कि वे अत्यंत पीड़ा के साथ यह निर्णय ले रहे हैं। उनके इस्तीफे के पीछे लंबे समय से चल रहा ‘कैश कांड’ और महाभियोग की बढ़ती आशंकाएं प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।
कैश कांड से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला तब सामने आया जब उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास के एक स्टोर रूम में आग लग गई। आग बुझाने पहुंचे फायरकर्मियों को वहां 500-500 रुपये के जले हुए नोटों से भरी बोरियां मिलीं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, यह राशि करीब 15 करोड़ रुपये बताई गई।इस घटना के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया और न्यायपालिका की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।
जांच कमेटी और वीडियो ने बढ़ाई गंभीरता
मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक आंतरिक कमेटी गठित की गई। जांच के दौरान एक 65 सेकंड का वीडियो भी सामने आया, जिसमें जली हुई नकदी से भरी बोरियां साफ दिखाई दे रही थीं। तीन सदस्यीय जांच समिति में Sheel Nagu, GS Sandhawalia और Anu Sivaraman शामिल थे। इस कमेटी ने पूरे मामले की गहराई से जांच की और रिपोर्ट तैयार की।
संसद से सड़क तक मचा हंगामा
इस केस ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। विपक्षी दलों ने संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग उठाई। वहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। मामले को लेकर जनता और राजनीतिक गलियारों में लगातार बहस होती रही, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया।
टाइमलाइन: कैसे बढ़ता गया मामला
मार्च 2025 में मामला सामने आने के बाद 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका ट्रांसफर प्रस्तावित किया। 22 मार्च को आंतरिक जांच कमेटी गठित हुई और वीडियो सार्वजनिक किया गया। 23 मार्च को तीन सदस्यीय समिति बनी और 25 मार्च को उनके आवास का निरीक्षण किया गया। 28 मार्च को उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी हुआ। इसके बाद 5 अप्रैल 2025 को उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में शपथ ली, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी बेअसर
जस्टिस वर्मा ने जांच कमेटी की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और जांच जारी रखने के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट में भी उन्हें आरोपों के घेरे में माना गया। करीब 13 महीनों तक चले इस विवाद के बाद, महाभियोग की संभावनाओं के बीच जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देकर एक बड़ा कदम उठाया। हालांकि, उनके इस्तीफे से यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह निश्चित रूप से इस पूरे प्रकरण का एक अहम मोड़ साबित हुआ है।