बिल्हौर में ‘कब्जा मॉडल’ का आरोप: गरीबों के घर उजाड़कर खड़ी हुई बाउंड्री
Mediawali news, Noida
कानपुर के चौबेपुर ब्लॉक क्षेत्र के इंदलपुर (सम्भल मिश्रान) गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है, जहां समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
गरीबों का विस्थापन और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
समाजवादी पार्टी की पूर्व प्रत्याशी रचना सिंह गौतम ने आरोप लगाया कि जीटी रोड चौड़ीकरण के दौरान दशकों से ‘आबादी’ भूमि पर रह रहे गरीब परिवारों को पुलिस बल के जरिए बेघर कर दिया गया। बिना किसी पुनर्वास योजना के इन परिवारों को सड़क पर छोड़ देना अमानवीय और अलोकतांत्रिक बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई करते हुए न तो उचित नोटिस दिया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की।
रातों-रात बनी बाउंड्री वॉल, उठे भ्रष्टाचार के आरोप
सबसे बड़ा सवाल उस जमीन पर खड़ी की गई लगभग 10 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि इस निर्माण के लिए न कोई सरकारी बजट पास हुआ, न ही कोई टेंडर जारी किया गया। इसके बावजूद रातों-रात निर्माण पूरा हो गया, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सपा नेताओं का कहना है कि सरकारी जमीन पर इस तरह निजी तरीके से निर्माण कराना सीधे तौर पर ‘कब्जा’ और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।
भूमि पूजन और राजनीतिक संदेश
इस विवाद के बीच भाजपा विधायक राहुल बच्चा सोनकर द्वारा उसी जमीन पर भूमि पूजन किए जाने ने विवाद को और बढ़ा दिया है। ढोल-नगाड़ों के साथ हुए इस कार्यक्रम को विपक्ष ने “गरीबों के उजड़ने का जश्न” बताया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब उस जमीन पर किसी सरकारी योजना का प्रस्ताव तक नहीं है, तो भूमि पूजन किस आधार पर किया गया।
प्रशासनिक दबाव और अधिकारियों पर कार्रवाई के आरोप
मामले में प्रशासनिक दमन के भी आरोप लगाए गए हैं। सपा का दावा है कि एक महिला तहसीलदार, जिन्होंने कथित अनियमितताओं का विरोध किया, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। साथ ही, बिल्हौर के एसडीएम का अचानक तबादला भी संदेह के घेरे में है। विपक्ष का कहना है कि ईमानदार अधिकारियों को हटाकर इस ‘कब्जा मॉडल’ को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सपा की मांग और आगे की रणनीति
समाजवादी पार्टी ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, अवैध निर्माण हटाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही है। सपा नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे और प्रभावित गरीब परिवारों के साथ खड़े रहेंगे।