अंतरंग में सजी कथक की खूबसूरत शाम
Mediawali news
नई दिल्ली में Shri Ram Centre for Performing Arts में इंटरनेशनल डांस डे के अवसर पर आमद डांस सेंटर का वार्षिक उत्सव “अंतरंग” आयोजित किया गया। इस खास शाम में कथक की रूहानी गहराई और Lucknow Gharana की नफासत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन प्रसिद्ध कथक गुरु Rani Khanam ने किया।
सोलो प्रस्तुतियों में दिखी विविधता
कार्यक्रम की शुरुआत सोलो प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें युवा कलाकारों ने कथक के अलग-अलग रंग पेश किए। महिमा श्रीवास्तव ने Mirza Ghalib की ग़ज़ल “दिल-ए-नादान” पर भावपूर्ण अभिनय किया, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। वहीं निधि संभ्रवाल ने “ठुमक चलत रामचंद्र” के माध्यम से वात्सल्य रस को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
इशानी बनर्जी ने राधा के विरह भाव को जीवंत किया, जबकि श्रुति त्यागी ने तीनताल में अपने जटिल फुटवर्क से तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। अन्य कलाकारों—निशा केसरी, अर्चिशा शर्मा, अवीशी अग्रवाल और शाइनी कोमल—ने भी अपनी प्रस्तुतियों से खूब सराहना बटोरी।
समूह प्रस्तुतियों में आध्यात्मिक रंग
ग्रुप परफॉर्मेंस में शिव-पार्वती के अर्धांग रूप और सरस्वती वंदना ने मंच पर आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। इन प्रस्तुतियों में नृत्य, भाव और संगीत का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
प्रीति महांसारिया, गीतिका और कविता की त्रयी द्वारा प्रस्तुत ग़ज़ल “करार” ने दर्शकों को यादों के गलियारों में ले जाकर भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया। हर प्रस्तुति में लखनऊ घराने की कोमलता और नजाकत स्पष्ट झलक रही थी।
भक्तिमय समापन ने बांधा समां
कार्यक्रम का समापन “कान्हा रे नंद नंदन” की भक्तिमय प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को भक्ति और सौंदर्य से भर दिया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को खड़े होकर सराहा और कलाकारों की मेहनत की खुलकर प्रशंसा की।
गुरु रानी खानम की सराहना
अंत में गुरु Rani Khanam ने सभी कलाकारों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि “अंतरंग” केवल एक मंच नहीं, बल्कि परंपरा और भावनाओं को जोड़ने का माध्यम है, जहां युवा कलाकार कथक को पूरी सच्चाई और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
यह आयोजन न केवल कला प्रेमियों के लिए यादगार रहा, बल्कि कथक की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास भी साबित हुआ।