पशु चिकित्सालय में डॉक्टर नदारद, इलाज के इंतजार में परेशान पशुपालक

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नोएडा।
जिले में पशुपालन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। बरोला स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी के कारण पशुपालकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति आम बात बन गई है।

सीमित स्टाफ, बढ़ती परेशानी

बरोला के राजकीय पशु चिकित्सालय में फिलहाल केवल एक पशु चिकित्सक, एक स्टाफ कर्मचारी और दो हेल्पर तैनात हैं। इतने कम संसाधनों के सहारे आसपास के कई गांवों और कॉलोनियों के पशुपालक इसी केंद्र पर निर्भर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में दिनभर में औसतन चार से छह पशु ही लाए जाते हैं, जबकि इलाके में पशुओं की संख्या कहीं ज्यादा है।

ओपीडी समय में डॉक्टर गायब

पशुपालकों का कहना है कि कई बार वे अपने बीमार पशुओं को लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन ओपीडी समय में डॉक्टर मौजूद नहीं मिलते। पूछने पर बताया जाता है कि डॉक्टर टीकाकरण अभियान या फील्ड में वैक्सीनेशन के लिए गए हुए हैं। ऐसे में पशुपालकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है या मजबूरी में निजी पशु चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है।

बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर

अस्पताल की हालत भी बेहद खराब है। खिड़कियां टूटी हुई हैं और ओपीडी में सामान अव्यवस्थित तरीके से रखा हुआ है। एनबीटी की टीम के दौरे के दौरान अस्पताल में सिर्फ एक हेल्पर मौजूद मिला, जबकि डॉक्टर और अन्य स्टाफ नदारद थे।

महंगे निजी इलाज की मजबूरी

सरकारी अस्पताल में इलाज किफायती होता है और कई दवाएं मुफ्त या कम शुल्क पर मिलती हैं, लेकिन स्टाफ की कमी और डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण पशुपालक इस सुविधा का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज काफी महंगा पड़ता है।

स्थानीय लोगों की मांग

स्थानीय पशुपालकों ने मांग की है कि बरोला राजकीय पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही ओपीडी समय का सख्ती से पालन कराया जाए। लोगों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में पशुपालन को बढ़ावा देना चाहती है, तो ऐसे प्राथमिक पशु चिकित्सालयों की हालत सुधारना जरूरी है, ताकि पशुओं को समय पर और सस्ता इलाज मिल सके।

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